सरहद की रखवाली करने वाली तनोट माता के मंदिर का हो रहा नवनिर्माण

जैसलमेर,(राजस्थान)। भारत-पाक सरहद पर भारत की सीमा की रखवाली करने वाली तनोट माता थार की वैष्णो देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। जैसलमेर के तनोट ग्राम पंचायत में इनका मंदिर स्थित है। जहां प्रतिवर्ष देशभर से हजारों की संख्या में भक्त और पर्यटक आते हैं। इस माता के मंदिर की पूजा अर्चना का पूरा जिम्मा बॉर्डर फ्रंटलाइनर यानी बीएसएफ के जवानों के कंधों पर हैं। मंदिर परिसर में बढ़ती लोगों की श्रद्धा को देखते हुए राजस्थान और केंद्र सरकार के पर्यटन विभाग और सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से मंदिर का नव निर्माण करवाया जा रहा है।

​​बीएसएफ डीआईजी व्यास ने किया भूमि पूजन
इसी क्रम में नव मंदिर का निर्माण का भूमि पूजन शनिवार को किया गया। भूमि पूजन के दौरान महंत नारायण गिरी के निर्देशन में बीएसएफ के डीआईजी असीम व्यास ने भूमि पूजन किया। वहीं इस दौरान बीएसएफ के आलाधिकारियों के परिवारों के साथ ही जनप्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम के साक्षी बने। इस दौरान असीम व्यास के साथ ही 166 वी बीएसएफ बटालियन के सभी अधिकारी अपने परिवार के साथ ही मौजूद थे।

बीएसएफ अधिकारियों के साथ कई महंत भी मौजूद
भूमि पूजन कार्यक्रम में बीएसएफ अधिकारियों के साथ महंत नारायणगिरी दूधेश्वर नाथ मंदिर गाजियाबाद यूपी भी शामिल थे। इसी तरह रानी भटियाणी मंदिर जसोल के महंत कंवर हरिश्चंद्र सिंह के साथ ही जनप्रतिनिधि और भामाशाह भी उपस्थित रहे। भूमि पूजन के दौरान माता रानी भटियाणी संस्थान जसोल के महंत की ओर से चांदी के औजार, जिसमें गेती,पावड़ा और तगारी दिए गए।

​नए मन्दिर की भूमि पर खुदाई का काम हुआ शुरू

वहीं तनोट माता मंदिर के नए निर्माण कार्य को शुरू करने के लिए मुख्य मंदिर के पीछे भूमि पूजन किया गया। इसके बाद नए मन्दिर की भूमि पर खुदाई का काम भी शुरू किया गया। इस दौरान तनोट माता मंदिर के मुख्य प्रांगण में पूजा अर्चना कर दर्शनार्थियों के लिए प्रसाद वितरण का भी कार्यक्रम आयोजित हुआ। यहां दर्शनार्थियों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई।
बता दें कि बीएसएफ इस मंदिर का निर्माण बीएसएफ के जवानों और भामाशाह के सहयोग से करने जा रहा है। इसके लिए जैसलमेर जिले के समाजसेवी और भामाशाह जगदीश सुथार द्वारा जहां 25 लाख रुपए की धनराशि दी गई। वहीं भामाशाह तेजसिंह ने 1 लाख रुपये और जसोल माता मंदिर के महंत हरिश्चंद्र सिंह द्वारा 50 हजार रुपये, वही महंत नारायण गिरी द्वारा 11 हजार रुपये की सहयोग राशि दी गई है। बताया जा रहा है कि मंदिर नव निर्माण के लिए भामाशाहों के सहयोग की श्रृंखला लगातार जारी रहेगी।

​1200 पुराना मंदिर बीएसएफ के जिम्मे

जानकारी के लिए बता दें कि लगभग 1200 वर्ष पूर्व यहां तनोट माता के निज मंदिर का निर्माण हुआ था। उस समय जैसलमेर की राजधानी तनोट थी। कालांतर में देखभाल के अभाव में ये मंदिर मिट्टी में दब गया था। वहीं 1965 में हुए भारत-पाक युद्ध के दौरान बीएसएफ के जवानों ने इस मंदिर की देखरेख का जिम्मा उठाया। इस दौरान युद्ध में पाकिस्तान की सेना की ओर से यहां सैकड़ों बम गिराए गए थे। लेकिन तनोट माता के प्रताप से ये सभी बम डिफ्यूज हुए थे। इसके कारण BSF के जवानों की इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था बढ़ती गई। अब बीएसएफ ने मंदिर परिसर के पीछे तनोट माता के नवनिर्मित मंदिर बनाने का जिम्मा उठाया है।

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