स्कूल बसों में बारातियों की ढुलाई से परिवहन विभाग पर उठे सवाल, वैध बस ऑपरेटरों को भारी नुकसान

  • “नियमों की धज्जियां: स्कूल बसों का दुरुपयोग”
  • “परिवहन विभाग की चुप्पी से बढ़ा विवाद”
  • “वैध बस ऑपरेटरों पर आर्थिक मार, विभाग पर मिलीभगत के आरोप”

शोभित शर्मा,खड़गवां/छत्तीसगढ़। परिवहन विभाग की लापरवाही के चलते क्षेत्र में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। स्कूल बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए पंजीकृत बसों का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। ये बसें अब शादी-ब्याह जैसे निजी आयोजनों में बारातियों को ढोने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। इससे न केवल नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं बल्कि वैध रूप से टैक्स और परमिट शुल्क अदा करने वाले बस ऑपरेटरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, मोटरयान अधिनियम के तहत स्कूल बसों का उपयोग केवल छात्रों के आवागमन तक सीमित होता है। शादी समारोहों में उपयोग होने वाले वाहनों के लिए अलग परमिट, टैक्स और बीमा नियम लागू होते हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर स्कूल बसों का उपयोग बारात ले जाने में किया जा रहा है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा है, क्योंकि इन बसों में आवश्यक बीमा और अनुमति नहीं होती।
स्थानीय बस ऑपरेटरों का कहना है कि वे प्रतिवर्ष हजारों से लाखों रुपये तक टैक्स, परमिट शुल्क और फिटनेस खर्च सरकार को अदा करते हैं। इसके बावजूद अवैध रूप से चल रही स्कूल बसें उनके व्यवसाय को प्रभावित कर रही हैं। शादी-विवाह के सीजन में जहां उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद होती है, वहीं स्कूल बसों द्वारा सस्ते में बारात ले जाने से उनका काम ठप पड़ रहा है।
बस ऑपरेटरों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों को इस अवैध गतिविधि की पूरी जानकारी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। सूत्रों का कहना है कि यह मामला मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जहां कुछ बस संचालक और विभागीय अधिकारी मिलकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार स्कूल बसों का व्यावसायिक उपयोग प्रतिबंधित है। नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना, परमिट निरस्तीकरण और वाहन जब्ती तक की कार्रवाई हो सकती है। इसके बावजूद विभाग की चुप्पी ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।
ग्रामीणों और बस ऑपरेटरों ने मांग की है कि स्कूल बसों के दुरुपयोग पर तत्काल कार्रवाई की जाए, दोषी संचालकों पर सख्त जुर्माना लगाया जाए और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह न केवल नियमों की अवहेलना को बढ़ावा देगा बल्कि वैध व्यवसाय करने वालों का मनोबल भी तोड़ेगा।

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