कानपुर में 3200 करोड़ का महाघोटाला, ईडी की रडार पर आए 12 बड़े बैंक

कानपुर में 3200 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन मामले में ईडी ने 12 बैंकों को जांच के दायरे में लिया है, जहां 68 फर्जी खातों का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस आरोपियों की चल-अचल संपत्ति की जांच कर रही है, जबकि मुख्य आरोपी का बेटा अभी भी फरार है।

कानपुर/उत्तर प्रदेश। शहर में 68 बैंक खातों के जरिए 3200 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध लेनदेन का बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस प्रकरण में मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है। मामले में 12 बैंक भी जांच के दायरे में आ गए हैं, जिनमें आरोपितों द्वारा कुल 68 खाते खुलवाए गए थे।
ईडी अब यह जांच करेगी कि इन खातों को खोलने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और किस आधार पर एक-एक दिन में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ। वहीं, पुलिस भी आरोपितों की चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा जुटाने में लगी है।
प्रकरण में जाजमऊ के टेनरी व स्क्रैप कारोबारी महफूज आलम उर्फ पप्पू छूरी वाला को इस अवैध साम्राज्य का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। पुलिस अब तक महफूज के साले महताब आलम, उसके बेटे मासूम, स्वयं महफूज, गिरोह के सदस्य फिरोज खान और संजीव दीक्षित को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, गिरोह से जुड़े नूर आलम ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है।
जांच में सामने आया है कि 12 बैंकों में खोले गए 68 खातों के माध्यम से यह भारी-भरकम लेनदेन किया गया। इनमें एचडीएफसी बैंक में 14, आरबीएल बैंक में पांच, इंडसइंड बैंक में पांच, कोटक महिंद्रा बैंक में छह, यूनियन बैंक में चार, एक्सिस बैंक में तीन, बंधन बैंक में चार, आईसीआईसीआई बैंक में दो, सिटी यूनियन बैंक में सात, बैंक ऑफ बड़ौदा में दो और बैंक ऑफ इंडिया में एक खाता शामिल है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने टेनरी, स्क्रैप और स्लॉटर हाउस के नाम पर 400 से अधिक फर्जी फर्में बना रखी थीं, जिनके जरिए अवैध लेनदेन को अंजाम दिया गया। मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के चलते ईडी ने बीते सप्ताह से ही आरोपितों की गतिविधियों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी थी।
ईडी ने कानपुर पुलिस से मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, आरोपितों का विवरण और जांच से संबंधित साक्ष्य मांगे हैं। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, अब यह जांच की जाएगी कि इतनी बड़ी संख्या में खाते किस आधार पर खोले गए और उनमें इतने बड़े पैमाने पर लेनदेन कैसे हुआ।
मामले में मुख्य आरोपित महफूज आलम का बेटा फैज अभी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। यह मामला तब सामने आया जब 16 फरवरी को यशोदा नगर क्षेत्र में कथित लूट की सूचना पर पुलिस ने जांच शुरू की। बाद में जांच में खुलासा हुआ कि यह रकम अवैध लेनदेन का हिस्सा थी। पुलिस और आयकर विभाग की संयुक्त जांच में पता चला कि महफूज और उसके परिजनों से जुड़े खातों में करीब ढाई वर्षों में 3200 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। फिलहाल ईडी और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई जारी है और मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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