सिघत जलाशय नहर लाइनिंग निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल, करोड़ों की लागत पर घटिया काम का आरोप

सिघत जलाशय नहर लाइनिंग निर्माण कार्य में घटिया सामग्री और तकनीकी मानकों की अनदेखी से किसानों को लाभ मिलने पर संकट गहराया, विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप।
शोभित शर्मा,एमसीबी/छत्तीसगढ़। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सिघत जलाशय से निकल रही नहर लाइनिंग निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। करोड़ों रुपए की लागत से एनएसटी कंपनी द्वारा कराया जा रहा यह कार्य विभागीय मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया है। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि घटिया सामग्री और तकनीकी मानकों की अनदेखी के चलते उन्हें जलाशय से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।
जांच में सामने आया कि बेसमेंट की ढलाई 15 सेंटीमीटर और साइड वाल की ढलाई 7.5 सेंटीमीटर होनी चाहिए थी, लेकिन ठेकेदार द्वारा बेसमेंट की ढलाई महज़ 10 सेंटीमीटर और साइड वाल की ढलाई 5 सेंटीमीटर की जा रही है। वहीं, निर्माण कार्य में बाईब्रेटर का उपयोग भी नहीं किया जा रहा है। ठेकेदार के सुपरवाइजर ने इसे मशीन खराब होने का बहाना बताया।
निर्माण स्थल पर उपयोग की जा रही सामग्री भी ब्रांडेड नहीं है। छड़ की बंधाई विभागीय मानकों से हटकर की गई है और 60 सेंटीमीटर ऊंची ढलाई में केवल 8 एमएम की छड़ का प्रयोग किया गया है। गिट्टी के मानक आकार 20 एमएम की जगह 30 एमएम गिट्टी का उपयोग किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण स्थल पर किसी प्रकार का सूचना पटल या बोर्ड नहीं लगाया गया है। विभागीय इंजीनियर की मौजूदगी में ही मापदंडों की अनदेखी की जा रही है।
जलसंसाधन विभाग के इंजीनियर अजय कुमार साहू ने कहा कि उन्होंने ठेकेदार को सही निर्माण कार्य और गुणवत्ता बनाए रखने का निर्देश दिया है। यदि मानकों का पालन नहीं किया गया तो निर्माण कार्य को तोड़कर पुनः कराया जाएगा। अब देखना यह है कि विभागीय इंजीनियर वास्तव में घटिया निर्माण को रुकवाते हैं या ठेकेदार के साथ सांठगांठ कर इसे सही ठहराते हैं।




