जम्मू स्थित ऑयल टैंकरों में लगी आग, हुए धमाके, तीन झुग्गियां जलकर राख

जम्मू/एजेंसी। जम्मू के नरवाल क्षेत्र में स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में बनाई गई पार्किंग में खड़े खाली ऑयल टैंकरों में बुधवार दोपहर को रहस्यमय परिस्थितियों में भीषण आग लग गई। इसमें आठ टैंकर, दो स्कूटियां और साथ सटे क्षेत्र में तीन झुग्गियां आग की भेंट चढ़ गईं।
आग इतनी भयंकर थी कि टैंकर व उनके टायरों में हो रहे धमाकों की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दे रही थी। आग से उठता धुआं आसपास के क्षेत्र में फैल गया। फायर एवं इमरजेंसी सर्विसेस के सात फायर टेंडर ने तीन घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया। इस दौरान आग बुझाते डिवीजनल फायर ऑफिसर (डीएफओ) सहित तीन कर्मी चोट लगने से घायल हो गए। अभी भी घटनास्थल पर एहतियातन एक फायर टेंडर तैनात है।
आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चला है। टांसपोर्ट नगर में आरटीओ कार्यालय के पीछे स्थित खाली प्लॉट में टैंकरों की पार्किंग के लिए जगह बनाई गई है। चूंकि शहर में आयल टैंकरों का दिन के समय परिचालन वर्जित होता है, ऐसे में चालक इसी स्थान पर टैंकर खड़े कर अपने घरों में चले जाते हैं। रोजाना की तरह बुधवार को भी इसी पार्किंग में 30 से अधिक आयल टैंकर खड़े थे। दोपहर 12:22 बजे वहां से गुजर रहे राहगीर जगदीश कुमार ने एक टैंकर के टायर से धुआं निकलते देखा। उसने तुरंत सूचना फायर कंट्रोल रूम को 101 नंबर पर दी। इस बीच, आसपास खड़े अन्य टैंकरों में भी आग फैल गई।
कुछ ही देर में गांधीनगर स्थित फायर एवं इमरजेंसी सर्विसेस के छह फायर टेंडर लेकर डीएफओ जफर घटनास्थल पर पहुंचे और गंग्याल से भी एक फायर ब्रिगेड की गाड़ी को बुला लिया गया। डीएफओ ने बताया कि आग इतनी भयानक थी कि धमाकों की आवाज के साथ कुछ टैंकर के टायर भी आग से फट गए। चुनौती गंभीर थी, जवानों ने आग बुझाने के साथ टैंकरों को एक-एक कर निकालना शुरू किया। बताया जा रहा है कि वहां खड़े दो टैंकर पेट्रोलियम पदार्थों से लदे थे, जिन्हें सबसे पहले निकालने की काशिश के दौरान उनके अगले हिस्से में आग लग गई, जिस पर तुरंत काबू पाया गया। इस दौरान छह ऑयल टैंकर पूरी तरह, दो टैंकर का कुछ हिस्सा, दो स्कूटियां और तीन झुग्गियां भी राख हो गईं। सौभाग्यवश कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस पार्किंग स्थल में आग लगी, वहां 30 से अधिक खाली आयल टैंकर खड़े थे। घटनास्थल के करीब 400 मीटर दूर आरटीओ कार्यालय, 800 मीटर दूर जम्मू रेलवे स्टेशन की पटरी व करीब एक किलोमीटर दूर तीन आयल कंपनियों के डिपो भी हैं। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।

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