कौशांबी मेडिकल कॉलेज में काला मोतिया जागरूकता अभियान, नियमित नेत्र जांच पर जोर

सचिन पाण्डेय,कौशांबी/उत्तर प्रदेश। जिले में सोमवार को काला मोतिया (ग्लूकोमा) के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। यह कार्यक्रम स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कौशांबी के तत्वावधान में आयोजित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य आमजन को इस गंभीर नेत्र रोग के बारे में जानकारी देना और समय पर नेत्र जांच कराने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे चिकित्सालय परिसर में जागरूकता रैली से हुई। इसमें मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र-छात्राएं और मेडिकल स्टाफ शामिल हुए। प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर लोगों को बताया कि काला मोतिया को “दृष्टि का मूक चोर” कहा जाता है, क्योंकि यह बिना दर्द के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को प्रभावित करता है। रैली के माध्यम से मरीजों और उनके परिजनों को नियमित नेत्र जांच कराने का संदेश दिया गया।
इसके बाद कॉलेज के लेक्चर थिएटर-2 में विशेष जागरूकता सत्र आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि काला मोतिया एक गंभीर नेत्र रोग है, जिसमें धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होती जाती है और कई बार मरीज को इसका पता भी नहीं चलता। उन्होंने विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को नियमित नेत्र जांच कराने की सलाह दी।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मृदुला रंजन ने बताया कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते और कई बार मरीज को तब तक पता नहीं चलता जब तक आंखों की रोशनी काफी कम न हो जाए। उन्होंने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप या जिनके परिवार में पहले से ग्लूकोमा का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और नियमित रूप से आंखों के दबाव की जांच करानी चाहिए।
विशेषज्ञों ने बताया कि काला मोतिया से होने वाले नुकसान को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन समय पर पहचान और उचित उपचार से आंखों की बची हुई दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है। इस अभियान के माध्यम से चिकित्सकों और छात्रों ने लोगों को यह संदेश दिया कि नियमित नेत्र जांच कराकर इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है और समय रहते इलाज से दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है।




