6 साल से खुला ‘मौत का गड्ढा’ बना काल!
ग्रेटर नोएडा में 3 साल के मासूम की गई जान, प्रशासन बेपरवाह

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के दनकौर क्षेत्र के दलेलगढ़ गांव में गड्ढे में गिरने से तीन वर्षीय बच्चे की मौत ने एक बार फिर प्राधिकरण और प्रशासन की लापरवाही का रवैया फिर सामने ला दिया है। चौकाने की बात तो ह है कि शिकायत पर मौके का निरीक्षण करने के बाद भी प्रशासन व प्राधिकरण ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई।
नोएडा के सेक्टर 150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर कर इंजीनियर युवराज की मौत, पिछले सप्ताह ग्रेटर नोएडा में एक नाले में कार गिरने और दिल्ली के जनकपुरी में सड़क पर खोदे गए गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत हो गई थी।
इन घटनाओं के बाद भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण व प्रशासन के अधिकारियों की संवेदना तक नहीं जागी। नोएडा में हुई घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सख्त रुख अपनाते हुए मामले की जांच के लिए एसआइटी गठित की थी। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ तक को पद से हटा दिया था।
मुख्यमंत्री ने प्राधिकरणों को जिले में सभी हादसा संभावित जगहों को चिह्नित कर उन्हें दुरुस्त करने को निर्देश दिए थे। प्राधिकरणों ने टीम दौड़ाकर जगह चिह्नित करने का दावा भी किया था, लेकिन ग्रेटर नोएडा की दो घटनाओं ने प्राधिकरण की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ ग्रेनो प्राधिकरण कह रहा है कि जमीन उसकी नहीं बल्कि किसान की है। वहीं ग्रामीणों का दावा है कि जमीन प्राधिकरण की ही है। यही कारण है कि ग्रामीणों ने चार जनवरी को लिखित में शिकायत की थी, लेकिन प्राधिकरण की ओर से कोई भी मौके पर नहीं आया।
हादसा होने के बाद प्राधिकरण के अधिकारी भागते हुए आए और जमीन किसान की बता अपना पल्ला झाड़ने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि प्राधिकरण टीम हादसे के बाद गांव आई, यदि शिकायत करने के बाद जांच के लिए आ जाती, तो आज मासूम की जान बच सकती थी। हादसे के बाद प्राधिकरण अपनी जमीन को किसान की जमीन बता रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब छह वर्ष पहले इस जमीन पर गड्ढा हुआ था। तभी से शिकायत का सिलसिला जारी है। यहां करीब 15 से 20 फीट गहरा गड्ढा है। यहां से मिट्टी निकाली गई है। वर्षा का पानी अब भरा हुआ है। यदि इस जगह पर मिट्टी का भराव कर दिया जाता या फिर चारदीवारी कर दी जाती, तो आज बच्चा अपने परिवार के साथ होता।




