गरीबों के खातों में आए लाखों, फिर मिनटों में निकले, रायबरेली में 43 लाख का रहस्यमय लेन-देन

रायबरेली/उत्तर प्रदेश। रायबरेली के ऊंचाहार थाना क्षेत्र में गरीब और सीधे-सादे ग्रामीणों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का मामला सामने आया है। आरोप है कि बिना ब्याज के सरकारी लोन का लालच देकर ग्रामीणों को इस कदर फंसाया गया कि उन्हें भनक तक नहीं लगी और उनके खाते मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया बन गए।
झाला बाग गांव समेत आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि गुड़िया गोपालपुर निवासी अमित कुमार और हटवा निवासी लवकुश ने खुद को सरकारी योजना से जुड़ा बताते हुए पांच लाख रुपये तक का बिना ब्याज लोन दिलाने की बात कही। इसी बहाने उन्होंने ग्रामीणों से नए सिम कार्ड निकलवाए और उन्हीं सिम से यूको बैंक में खाते खुलवाए।
खाता खुलते ही एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम आरोपियों ने अपने पास रख लिए। ग्रामीणों से कहा गया कि जब वे एक लाख रुपये “सेवा शुल्क” देंगे, तभी एटीएम और सिम सौंपे जाएंगे। इस दौरान खातों में होने वाले लेन-देन की कोई जानकारी खाताधारकों को नहीं दी गई।
करीब एक महीने बाद मामला तब उजागर हुआ जब राजेश कुमार बैंक में पासबुक अपडेट कराने पहुंचे। पासबुक में लाखों रुपये के लेन-देन देखकर उनके होश उड़ गए। बैंक मैनेजर ने खातों में लगातार संदिग्ध ट्रांजैक्शन होने की जानकारी दी।
जांच में सामने आया कि गीता देवी (12 लाख रुपये), राजेश कुमार (7 लाख रुपये), संजीव कुमार (6.5 लाख रुपये), हरिश्चंद्र (5.5 लाख रुपये), हिमांशु मौर्य (5.3 लाख रुपये), राजू यादव (3.5 लाख रुपये), बब्लू (3 लाख रुपये) से कुल मिलाकर 43 लाख रुपये से अधिक का लेन-देन इन खातों से हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने सभी संबंधित खातों को फ्रीज कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि यह रकम साइबर ठगी या किसी बड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है।
ग्रामीणों ने ऊंचाहार कोतवाली में दो बार शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। डलमऊ क्षेत्राधिकारी गिरजा शंकर त्रिपाठी ने मामले की जानकारी न होने की बात कही। अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि जब तक प्रार्थना पत्र नहीं मिलेगा, जांच कैसे होगी। उन्होंने यह भी कहा कि साइबर सेल पूरी तरह सक्रिय है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।




