धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की दिल्ली से वृंदावन तक की हिंदू सनातन एकता पदयात्रा पर गरमाई राजनीति

मेरठ/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे प्रदेश की राजनीति भी गरमाने लगी है। अयोध्या और काशी के बाद अब मथुरा को लेकर भी माहौल राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है। इसी कड़ी में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आगामी 7 नवंबर से 16 नवंबर तक दिल्ली से वृंदावन तक लगभग 170 किलोमीटर लंबी सनातन हिंदू एकता पदयात्रा निकालेंगे। अब इसको लेकर प्रदेश में राजनीतिक पारा हाई होने लगा हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की यह पदयात्रा दिल्ली से शुरू होकर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के साथ संपन्न होगी। दावा किया जा रहा है कि यह अब तक की सबसे विशाल पदयात्रा होगी, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं और देशभर से आए संतों की भागीदारी रहेगी। इस यात्रा को लेकर बीते दिनों वृंदावन के कृष्ण कृपा धाम में संत-समागम आयोजित हुआ।इसमें कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज, भाजपा सांसद मनोज तिवारी और देशभर से आए 200 से अधिक संतों और महंतों ने हिस्सा लिया था। बैठक में यात्रा की अनुशासन, धार्मिक मर्यादा और रूपरेखा पर चर्चा की गई है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस यात्रा को धार्मिक के साथ-साथ वैचारिक आंदोलन बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य है कि ब्रज क्षेत्र में मांस-मदिरा की बिक्री पर रोक। यमुना नदी का शुद्धिकरण और मंदिरों और मस्जिदों में राष्ट्रगीत का वादन। उन्होंने कहा कि जब तक सभी सनातनी एकजुट नहीं होते, उनका प्रयास जारी रहेगा। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यहां तक कहा कि जब तक मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान नहीं हो जाते, संघर्ष चलता रहेगा। यह तो केवल झांकी है, असली फिल्म अभी बाकी है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की यात्रा को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने धीरेंद्र शास्त्री पर हमला बोला है। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रंजन श्रीवास्तव ने कहा कि देश संविधान से चलेगा, किसी साधु-संत के कहने से नहीं। साधु-संत जिसकी भाषा बोल रहे हैं वो किसी से छुपी नहीं। वो हिन्दू-मुस्लिम कराना चाहते हैं। वोटों का तुष्टिकरण करना चाहते हैं। ये लोग देश का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। हम लोग उनसे कम हिन्दू नहीं है, लेकिन वो हिन्दू होने का सर्टिफिकेट बांटते हैं।
सपा प्रवक्ता दीपक रंजन ने कहा कि अगर मंशा उनकी ठीक नहीं तो सरकार को इस यात्रा पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। उनकी मंशा ठीक नहीं, वह हिन्दू मुस्लिम कराना चाहते हैं। तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहते है। वो किसी के बहकावे, इशारे और स्पॉन्सरशिप पर इस तरह की यात्रा निकालने जा रहे हैं। वहीं, धीरेंद्र शास्त्री की इस पदयात्रा ने एक ओर जहां धार्मिक उत्साह को हवा दी है। वहीं, दूसरी ओर चुनावी माहौल में राजनीतिक हलचल भी बढ़ा दी है।

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