एसटीएफ के इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा जिनका 1 करोड़ की घूस भी नहीं डिगा सकी ईमान

आगरा/उत्तर प्रदेश। आगरा से एक शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची। सीएम को बताया गया कि यहां चार नामी कंपनी के नाम पर नकली दवाओं को बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की जांच में एडीजी एसटीएफ अमिताभ यश, एफएसडीए के आयुक्त राजेश कुमार और अपर आयुक्त एस चौहान की अगुवाई में एक टीम ने जांच शुरू कर दी। ये टीम करीब दो हफ्ते तक आगरा में अलग-अलग जगहों पर जांच पड़ताल करती रही। जांच में जानकारी पुख्ता होते ही टीम ने आगरा के फव्वारा स्थित बंसल मेडिकल एजेंसी और हेमा मेडिकल स्टोरी और चार गोदामों पर छापा मार दिया। करीब 80 लाख रुपये की दवाएं जब्त की गईं।
माल ज्यादा बरामद हुआ था और जांच टीम के सीमित स्टाफ को देखते हुए मौके पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। साथ ही दूसरे जिलों से औषधि विभाग की टीम को बुला लिया गया। इसके अगले दिन रेड में हेमा मेडिकल स्टोरी के पास से करीब ढाई करोड़ की नकली दवाएं जब्त की गईं। रेड के दौरान हेमा मेडिकल स्टोर के संचालक हिमांशु अग्रवाल ने किसी तरह से जांच कर रहे एसटीएफ इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा और सहायक आयुक्त औषधि बस्ती, नरेश मोहन से संपर्क किया। उसने घूस देकर माल छोड़ने का ऑफर दिया। उसने कहा कि एक करोड़ हैं, पूरा रख लो और मामले को रफा-दफा कर दो। अगर कम हैं तो बताओ।
इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा ने इस पर एक ट्रैप बिछाया। उन्होंने पैसा लेकर आने को कहा और दूसरी तरफ एसपी एसटीएफ राकेश यादव को भी इसकी जानकारी दे दी। इसके बाद हिमांशु अग्रवाल जैसे ही नोटों से भरा बैग लेकर आया, उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
इंस्पेक्टर की इस ईमानदारी पर अब खूब सराहना मिल रही है। मूलरूप से ग्वालियर के रहने वाले यतेंद्र शर्मा पहले भी अपनी बहादुरी और ईमानदारी की कई मिसाल पेश कर चुके हैं। 2001 में वह दरोगा के रूप में भर्ती हुए थे। 2018 में वह इंस्पेक्टर प्रमोट हुए। एसटीएफ से पहले वह एटीएस में भी रह चके हैं। आगरा में इससे पहले उन्होंने फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियार मामले में खुलासा किया था। इस मामले में मुख्तार अंसारी गैंग के मोहम्मद जैद सहित कई लोग आरोपी बनाए गए।




