सीमाओं पर ड्रोन निरोधी यूनिट स्थापित करेगी मोदी सरकार

बीएसएफ स्थापना दिवस समारोह में अमित शाह ने की घोषणा

जोधपुर/राजस्थान। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को राजस्थान के जोधपुर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 60वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में भाग लिया। इस दौरान शाह ने परेड की समीक्षा की, सलामी ली और वीरता पुरस्कार विजेताओं को पदक और कुछ अन्य अलंकरण प्रदान किए। जवानों को संबोधित करते हुए शाह ने घोषणा की कि मोदी सरकार देश की सीमाओं की सुरक्षा को और भी सशक्त बनाने के लिए जल्द ही सीमाओं पर ड्रोन निरोधी यूनिट स्थापित करेगी।
शाह ने कहा, ‘आने वाले दिनों में ड्रोन का खतरा और भी गंभीर होने वाला है। हम इससे निपटने के लिए पूरे भारत के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए रक्षा तथा अनुसंधान संगठनों और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हम आने वाले समय में देश के लिए एक बृहद् ड्रोन रोधी इकाई बनाने जा रहे हैं।’
ता दें कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान से सटी भारत की सीमा पर इस वर्ष 260 से अधिक ड्रोन गिराए गए या बरामद किए गए हैं, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 110 ड्रोन का था। हथियार तथा मादक पदार्थ तस्करी के लिए इस्तेमाल किए गए ड्रोन सबसे अधिक पंजाब और कुछ राजस्थान तथा जम्मू में मार गिए या बरामद गए।
गृह मंत्री ने कहा, ‘साहस, शौर्य और बलिदान के बल पर बीएसएफ ने देश के ‘फर्स्ट लाइन ऑफ़ डिफेंस’ को मजबूत बनाया है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मोदी सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली बनाई है, इसे पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा पर लागू किया जाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘हमें असम के धुबरी (भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा) में नदी सीमा पर स्थापित सीआईबीएमएस के प्रभावशाली परिणाम देखने को मिल रहे हैं लेकिन कुछ सुधार की जरूरत है।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि उत्तरी सीमाओं पर बसी आबादी के विकास और उसे मुख्यधारा में लाने के लिए मोदी सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ को देश के सभी सीमावर्ती गांवों के लिए लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 48,000 करोड़ रुपये की निधि आवंटित करने के साथ सीमा सुरक्षा को बढ़ाना और इन दूरदराज के इलाकों में रहने वाली आबादी के लिए काम करना मोदी सरकार की ‘‘सबसे बड़ी उपलब्धि’’ है। बीएसएफ की स्थापना 1 दिसंबर 1965 को की गई थी जिसमें फिलहाल 2.65 लाख जवान हैं। मुख्य रूप से इसका काम देश के आंतरिक सुरक्षा क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कर्तव्यों के निर्वहन के साथ-साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ 6,300 किलोमीटर से अधिक की भारतीय सीमा की सुरक्षा करना है।

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