शाहदरा थाने ने 110 साल किए पूरे, दिल्ली के यमुनापार का पहला थाना है शाहदरा
Shahdara police station completed 110 years, Shahdara is the first police station in Yamunapar of Delhi

- शाहदरा थाने ने 110 साल पूरे किए हैं, ऐतिहासिक महत्व का स्थान
- क्रांतिकारियों का इस थाने से गहरा जुड़ाव, आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण
- पहली एफआईआर 7 जनवरी 1915 को सेंधमारी के मामले में दर्ज की गई थी
दिल्ली ब्यूरो। यमुनापार में 7 जनवरी 1915 को पहला थाना बना था शाहदरा। इस ऐतिहासिक पुलिस स्टेशन ने 110 साल पूरे कर लिए हैं। देश की आजादी के संघर्ष से लेकर आज तक ब्रिटिश काल के इस थाने से कई यादें जुड़ी हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों का इस थाने से जुड़ाव रहा है। ब्रिटिश सरकार को चुनौती देने वाले क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर इसी पुलिस स्टेशन में रखा जाता था। इस थाने में पहला मुकदमा 7 जनवरी 1915 को चोरी का दर्ज हुआ था।
डीसीपी शाहदरा प्रशांत गौतम बताते हैं कि ब्रिटिश पुलिस अफसर जॉन सॉन्डर्स के मामले में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन असोसिएशन (एचएसआरए) के सदस्यों को 1928 में गिरफ्तार कर शाहदरा थाने में रखा गया था। शाहदरा पुलिस स्टेशन को स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी कई ऐतिहासिक घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है। स्टेशन ने कई क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी देखी है, जिनमें लाहौर षड्यंत्र और शिमला सम्मेलन के मामलों में शामिल राजनीतिक वर्कर भी थे। काकोरी ट्रेन डकैती 1925 में हुई थी, जिसमें शामिल क्रांतिकारियों को यहां रखा गया था। इसी तरह चटगांव शस्त्रागार छापामारी समेत कई आंदोलनों के बाद भी आजादी के दीवानों को यहां पर रखा गया था।

खजान सिंह की शिकायत पर 7 जनवरी 1915 को पहली एफआईआर सेंधमारी (आईपीसी की धारा 457) की दर्ज हुई थी। शिकायत में कहा गया था कि रात में चोर घर के पीछे एक छेद करके भीतर घुस गए। उन्होंने जैसे ही माचिस जलाई तो वो रोशनी देखकर जागे। उनके जागने पर दोनों भाग गए, जिससे कोई कोई नुकसान नहीं हुआ।




