नोएडा में कॉल सेंटर के नाम पर चल रहा था ठगने का खेल, 13 गिरफ्तार

Fraud was going on in the name of call center in Noida, 13 arrested

नोएडा। डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर उत्पादकों को डिस्ट्रीब्यूटर दिलाने के झांसे में लेकर ठगने वाले काल सेंटर का सेक्टर 63 थाना पुलिस ने बृहस्पतिवार को राजफाश किया। पुलिस ने 13 आरोपितों को गिरफ्तार किया और सरगना कंपनी निदेशक अभी फरार है। गिरोह पर 100 से ज्यादा ग्राहकों से दो करोड़ तक की ठगी करने का अंदेशा है। आरोपितों ने जम्मू के एक ग्राहक के कॉस्टमेटिक मॉल को तमिलनाडु समेत देशभर में बिकवाने का झांसा दिया था और 4.85 लाख ठगे थे।
पीड़ित की शिकायत पर पुलिस आरोपितों तक पहुंची। जम्मू के सुधीर आनंद उर्फ सनी ने बताया कि 10 फरवरी को इंस्टाग्राम आईडी से ली जानकारी के आधार पर डिस्ट्रीब्यूटर भारत चैनल की ओर से सेल्स स्टाफ का फोन आया था।
नोएडा सेक्टर 65 जी ब्लॉक में कंपनी का कार्यालय होना बताया था। इंटरनेट मीडिया पर प्रचार से प्रतिमाह 8-10 डिस्ट्रीब्यूटर दिलाने का दावा किया था। सुनील ने ग्रेटर नोएडा में रहने वाले रिश्तेदार को कार्यालय भेजा तो उन्होंने हाईप्रोफाइल कंपनी कार्यालय होने का फीडबैक दिया।
इससे सुनील को विश्वास हुआ तो पैकेज के नाम पर पहले एक लाख रुपये लिए। फिर कई तरह के प्रमाणपत्र संबंधी कागजातों की कमी होना बताकर 80 हजार रुपये लिए। मार्केटिंग के नाम पर 3.05 लाख रुपये और ऐंठ लिए। इसके बाद और रुपयों की मांग की।
सुनील के मना करने पर धमकी देने लगे। पांच मार्च को पीड़ित ने नोएडा पहुंच पुलिस को शिकायत दी। डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्तिमोहन अवस्थी ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर टीम ने कार्यालय में दबिश दी और मौके से दिल्ली का केशव वशिष्ठ, बुलंदशहर के विकास शर्मा व रवि शर्मा (सगे भाई), गाजियाबाद का अमित।
अविनाश गिरी, आशीष कुमार, रितेश कुमार, कानपुर नगर का प्रदीप, चंदौसी का मनीष गौतम, आंबेडकरनगर का रितेश कुमार, बिहार हाजीपुर की कृतिका, गाजियाबाद की निधि, वाराणसी की अंजली पांडेय को गिरफ्तार किया।
आरोपितों के पास से 10 लैपटॉप, दो कंप्यूटर सिस्टम, दस मोबाइल, प्रिंटर, छह स्क्रिप्ट, चार मुहर, 50 प्रमाणपत्र, 17 नोटपैड, दो शील्ड, नेम प्लेट व दो खाली चेकबुक बरामद हुई। पूछताछ में बताया कि आरोपित इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम, फेसबुक व यूट्यूब पर डिस्ट्रीब्यूटर भारत चैनल के माध्यम से उत्पादकों को प्रलोभित करते।
फर्जी डिजिटल मार्केटिंग मॉडल पर उनके उत्पाद को देशभर में हाथोंहाथ बिकवाने और मोटा मुनाफा होने का झांसा देते। ग्राहकों से पैकेज और अन्य मदों में उलझाकर एक से पांच लाख रुपये तक की ठगी करते। इसमें इंटरनेट मीडिया से जानकारी जुटाकर दूरदराज के राज्यों के व्यवसायी को चुना जाता था।
दूसरी ओर आरोपित किसी भी उत्पाद का प्रचार नहीं करते थे। लोगों के पूछने पर अगले सप्ताह और अगले माह ही डिस्ट्रीब्यूटर मिलने की बात कहकर दो तीन माह तक टरकाते रहते थे। फिर वहां से कार्यालय खालीकर दूसरी जगह शिफ्ट करते।

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