‘आप रिटायर हो गए हैं’ प्रमोशन रद्द कर 7 वैज्ञानिकों को थमाया रिटायरमेंट लेटर, पैसों की वसूली का भी आदेश
'You have retired', 7 scientists were given retirement letters after cancelling their promotions, and were also ordered to recover the money

नालंदा/बिहार। नालंदा के हरनौत कृषि विज्ञान केंद्र के पांच वैज्ञानिकों को अचानक रिटायरमेंट का झटका लगा है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर ने उन्हें पत्र भेजकर सेवानिवृत्ति की सूचना दी है। हरनौत के कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत पांच वैज्ञानिक अधिकारियों को बिहार कृषि विश्वविद्यालय से एक पत्र मिला। इस पत्र ने उनकी जिंदगी में भूचाल ला दिया। पत्र में लिखा था कि वे अब रिटायर हो चुके हैं। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के इस फैसले के खिलाफ वैज्ञानिकों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। इस फैसले के विरोध में कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारियों ने कलमबंद धरना प्रदर्शन किया और इसे अनैतिक व असंवैधानिक करार दिया।
प्रदर्शन कर रहे कर्मियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने वैज्ञानिकों और प्रधानों की प्रोन्नति को निरस्त कर दिया है। साथ ही पूर्व में किए गए भुगतान की राशि वापस लेने का आदेश जारी किया है। उनका आरोप है कि कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित है, लेकिन 31 जनवरी की शाम को सात वैज्ञानिकों को अचानक पत्र भेजकर सूचित किया गया कि वे उसी दिन से सेवा से मुक्त हो चुके हैं।
कर्मचारियों ने यह भी बताया कि आमतौर पर सेवानिवृत्ति से दो महीने पहले बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है, लेकिन इस मामले में बिना किसी पूर्व सूचना के आदेश जारी कर दिया गया, जो नियमों की अनदेखी और पद के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है। इस फैसले से प्रभावित कर्मचारियों और उनके परिवारों में भारी असंतोष और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से अपील की है कि इस आदेश को तुरंत रद्द किया जाए और नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने इस फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि इसे वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस फैसले के बाद कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य कर्मचारी भी एकजुट हो गए हैं। हरनौत की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सीमा कुमारी, डॉ. ज्योति सिन्हा, डॉ. विद्याशंकर सिन्हा, डॉ. उमेश नारायण उमेश, डॉ. विभा रानी, रवि मोहन, अर्पणा कुमारी और पुनम पल्लवी सहित कई कर्मियों ने आशंका जताई कि यदि आज उनके साथ ऐसा हुआ है, तो कल अन्य कर्मचारियों पर भी ऐसा ही फैसला लागू किया जा सकता है। उन्होंने इसे सरासर अन्याय करार दिया और विभाग से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की।




