नोएडा में 10 करोड़ की जीएसटी चोरी, थाने में मांगा चिकन चीनी महिला का जबरदस्त ड्रामा

गलत कैटेगरी में दिखाया उत्पाद, करोड़ों का टैक्स बचाया

नोएडा। नोएडा में जीएसटी चोरी का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। दिल्ली-एनसीआर में टीवी स्क्रीन बनाने वाली एक कंपनी पर जीएसटी विभाग ने शिकंजा कसा और इस मामले में एक चीनी महिला और उसके भारतीय सहयोगी को गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों ने मिलकर टैक्स की गलत कैटेगरी दिखाकर और अंडर-इनवॉयसिंग के जरिए सरकार को करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। जांच एजेंसियों ने बताया कि नोएडा स्थित यह कंपनी वीडियो डिस्प्ले यूनिट (टीवी स्क्रीन) तैयार करती थी। नियमों के अनुसार, इस उत्पाद पर 28% जीएसटी लगाया जाना चाहिए था, लेकिन कंपनी संचालकों ने चालाकी दिखाते हुए इसे गलत कैटेगरी में दर्ज कर केवल 18% जीएसटी जमा किया। यानी प्रत्येक उत्पाद पर लगभग 10% टैक्स की चोरी की गई। लंबे समय तक यही प्रक्रिया अपनाकर कंपनी ने करोड़ों रुपये हड़प लिए।
इस घोटाले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें भारतीय कारोबारी विनय कुमार, जिसे टैक्स चोरी का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है और चीनी महिला एलिस ली, यह कंपनी संचालन में सक्रिय है, जिस पर सीधी संलिप्तता का आरोप है। दोनों आरोपियों को मेरठ स्थित जीएसटी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया। पेशी के दौरान चीनी महिला एलिस ली ने कोर्ट परिसर में जमकर हंगामा किया। वह अंग्रेजी और चीनी भाषा में जोर-जोर से कहती रही कि मुझे छोड़ो… मुझे चीनी होने के कारण गलत फंसाया गया है। पुलिस कर्मियों ने कई बार शांत रहने को कहा, लेकिन वह बार-बार चिल्लाती रही। मेरठ की स्पेशल सीजेएम दुर्गेश नंदिनी की कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह नजारा देखने को मिला।
महिला को मेरठ के महिला थाने में रखा गया। यहां भी उसने अजीबोगरीब नखरे दिखाए। खाने के लिए चिकन की डिमांड की, जिसे ऑनलाइन मंगाना पड़ा। थाने में दिया गया आरओ पानी पीने से मना कर दिया और ब्रांडेड कंपनी का पानी मंगवाया। महिला केवल वही चीजें खाती-पीती रही, जो उसकी पसंद की थीं। जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने सिर्फ गलत कैटेगरी में टैक्स दाखिल कर सरकार को चूना नहीं लगाया, बल्कि अंडर-इनवॉयसिंग का खेल भी खेला। अंडर-इनवॉयसिंग का तरीका महंगे उत्पाद को कागजों में सस्ता दिखाना। वास्तविक लेन-देन, ग्राहकों से पूरी कीमत कैश में वसूलना, लेकिन बिल पर कम राशि दिखाना। इस दोहरे खेल से कंपनी लंबे समय से करोड़ों रुपये टैक्स चोरी कर रही थी।
गौतमबुद्ध नगर के जीएसटी अधिकारियों ने बताया कि कंपनी के अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की गई। गवाहियों और रिकॉर्ड्स के मिलान में यह साफ हो गया कि योजनाबद्ध तरीके से टैक्स चोरी की जा रही थी। विभाग ने कंपनी से जुड़े दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और संदिग्ध खातों की भी जांच जारी है। गौरतलब है कि एलिस ली उर्फ ली तेंगली का आपराधिक इतिहास भी रहा है। सितंबर 2021 में यूपी एटीएस ने उसे जाली दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड खरीदने के आरोप में पकड़ा था। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल बैंकों से धोखाधड़ी कर करीब 5 करोड़ रुपये के फर्जी लेन-देन में किया गया था। उसका वीजा सितंबर 2020 में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद वह भारत में रहकर कारोबार करती रही।
फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। विभाग टैक्स चोरी की भरपाई की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में और नाम सामने आ सकते हैं। इस घोटाले ने एक बार फिर दिखा दिया है कि कैसे विदेशी और स्थानीय नेटवर्क मिलकर योजनाबद्ध तरीके से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार कितनी तेजी से इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर पाती है।

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