इनोवा के नाम पर लाखों का भुगतान, रजिस्ट्रेशन ई-रिक्शा का!
यूपी में अफसरों के फर्जीवाड़े पर विजिलेंस ने दर्ज की एफआईआर

शामली/उत्तर प्रदेश। शामली में उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम(यूपीआरएनएन) के अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग कर गजब खेल किया। ट्रैवल के लिए जिस इनोवा का इस्तेमाल दिखा लाखों के बिल पास करवाए, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर ई-रिक्शा का निकला। यही नहीं अधिकारी पेट्रोल की गाड़ी का इस्तेमाल करते रहे और बिल डीजल का पास करवाते रहे। विजिलेंस की जांच में ये फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद यूपीआरएनएन के सहायक आंकिक, इकाई प्रभारी, परियोजना प्रबंधक और ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।
शासन ने सहारनपुर के पिलखनी स्थित शेखुलहिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज में तैनात रहे सहायक आंकिक वीरेंद्र सिंह के खिलाफ शिकायतें मिलने पर 15 जुलाई 2022 में विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। वर्तमान में बरेली स्थित विद्युत इकाई में तैनात वीरेंद्र सिंह पर आरोप थे कि वह अपने भाई-भतीजों और रिश्तेदारों के नाम पर फर्म बनाकर इकाई के अधिकारियों पर अनैतिक दबाव बनाकर ठेके दिलवा रहे हैं। इसके साथ ही बिना काम करे व बिना सहायक अभियंता के हस्ताक्षर के भुगतान कर रहे हैं।
विजिलेंस ने जांच के बाद एक फरवरी 2024 को शासन को रिपोर्ट भेजी। विजिलेंस की जांच में सामने आया कि ठेकेदार द्वारा उपलब्ध करवाई गई कार, जो पेट्रोल की थी, उसे सांठगांठ कर डीजल के बिल बनाए गए। इसी प्रकार वाहन संख्या यूपी 14 डीटी 0068 को इनोवा बताकर दो लाख 59 हजार 386 रुपये का भुगतान लिया गया जबकि इनोवा कार के नंबर पर ई-रिक्शा पंजीकृत है।
इसी तरह स्विफ्ट डिजायर एवं इनोवा कार के नाम पर दिए गए बिल डीजल के हैं जबकि स्विफ्ट डिजायर पेट्रोल की थी और इनोवा का कोई अस्तित्व ही नही था। शिव ट्रैवल्स को “16.20 लाख के भुगतान तो किए गए लेकिन इससे संबंधित बिल मिले ही नहीं।
ठेकेदार ने बिल दिए, बिना जांचें कर दिए पास विजिलेंस के मुताबिक ठेकेदार प्रशांत कुमार ने इस्तेमाल में दिखाए गए वाहनों के फर्जी बिल बनाकर पेश किए जिन्हें इकाई प्रभारी राजन सिंह और परियोजना प्रबंधक सतीश उपाध्याय ने बिना जांचें परखे पास कर दिया। बिलों में इन दोनों के हस्ताक्षर मिले हैं। सहायक आंकिक वीरेन्द्र सिंह ने इनका भुगतान किया।



