दिल्ली में नकली वीजा बनाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश, मामले में 7 गिरफ्तार
A gang making fake visas busted in Delhi, 7 arrested in the case

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली ब्यूरो। दिल्ली पुलिस ने रविवार को कहा कि उसने पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में फर्जी वीजा बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मुख्य आरोपी के घर से भारी मात्रा में फर्जी वीजा बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और 14 नेपाली और दो भारतीय पासपोर्ट जब्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आरोपियों की पहचान तिलक नगर निवासी मुख्य आरोपी मनोज मोंगा (51), शिवा गौतम (42), नवीन राणा (25), बलबीर सिंह (65), जसविंदर सिंह (55), आसिफ अली (27) और एक यात्री संदीप के रूप में हुई है।पुलिस उपायुक्त (इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) उषा रंगनानी ने बताया कि 2 सितंबर की रात हरियाणा निवासी संदीप भारतीय पासपोर्ट के साथ इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के डिपार्चर इमिग्रेशन काउंटर पर पहुंचा था। रंगनानी ने बताया कि वह इटली के रोम जाने की फिराक में था, लेकिन उसके दस्तावेजों की जांच के दौरान उसके पासपोर्ट पर स्वीडन का फर्जी वीजा लगा पाया गया जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने बताया कि बाद में इस सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। पुलिस ने बताया कि विदेश जाने की चाहत रखने वाले संदीप ने ट्रैवल एजेंट आसिफ अली से संपर्क किया था। अली ने 10 लाख रुपये के बदले संदीप को यूरोपीय देश भेजने की बात कही। इसने कहा कि संदीप ने एजेंट के दो बैंक खातों में 7 लाख रुपये और 50,000 रुपये नकद जमा कराए। रंगनानी ने कहा कि अली और उसके साथियों नवीन राणा और शिवा गौतम ने संदीप की रोम यात्रा के लिए टिकट और स्वीडन के वीजा का इंतजाम किया। उन्होंने बताया कि अली, राणा और गौतम को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद बलबीर सिंह और जसविंदर सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने कहा कि जसविंदर सिंह ने मनोज मोंगा के बारे में बताया, जो नकली स्टिकर बनाने और डिजाइन करने में माहिर है। उन्होंने बताया कि मोंगा को तिलक नगर स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया, जहां से वह फर्जी वीजा बनाने का कारोबार कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, पांच साल पहले मोंगा जयदीप सिंह के संपर्क में आया और दोनों ने मिलकर मोंगा के घर पर फर्जी वीजा बनाने की एक अवैध फैक्टरी थी। इसने बताया कि बाद में मोंगा ने अपने ग्राहकों को फर्जी नियुक्ति पत्र भी देने शुरू कर दिए ताकि उनके वीजा वैध दिखें। पुलिस के अनुसार, मोंगा के घर से विभिन्न व्यक्तियों के नाम से जारी 30 फर्जी स्टिकर वीजा, विभिन्न देशों के 23 रबर स्टैंप, इटली के तीन फर्जी स्थायी निवास (पीआर) कार्ड, विभिन्न दूतावासों की लकड़ी की तीन डाई, विभिन्न देशों की चार धातु डाई, 14 मूल नेपाली पासपोर्ट, दो मूल भारतीय पासपोर्ट और कई अन्य चीजें बरामद हुईं।




