किराए की गाड़ी से पुलिस भर्ती के नाम पर पैसे वसूलने आया था देवेंद्र, लेडी कॉन्स्टेबल सहित 4 को एसटीएफ ने दबोचा

Devendra had come in a hired car to collect money in the name of police recruitment, STF arrested 4 people including a lady constable

गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। 2 दिन पूर्व गोरखपुर पुलिस और एसटीएफ को बड़ी सफलता हाथ लगी थी। जब बांसगांव की रहने वाली महिला पुलिस कांस्टेबल सहित दिल्ली के रहने वाले एक युवक को संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। पुलिस द्वारा पूछताछ में बड़ा खुलासा सामने आया है। जिसके तहत दिल्ली का रहने वाला देवेंद्र प्रताप सिंह और श्रावस्ती में तैनात महिला कांस्टेबल पिंकी सोनकर के बीच फेसबुक के माध्यम से दोस्ती हुई और दोनों ने मिलकर पुलिस भर्ती परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने के लिए 20-20 लाख रुपए में सौदा तय किया था। जिसके लिए पैसा वसूलने देवेंद्र प्रताप दिल्ली से किराए की स्कॉर्पियो लेकर गोरखपुर पिंकी के गांव पहुंचा था। जहां पुलिस ने संदेश के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया और गाड़ी को सीज कर दिया गया है। प्रशासन की तरफ से मुकदमा दर्ज करने के बाद दोनों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया है। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
पुलिस भर्ती परीक्षा से एक दिन पूर्व गोरखपुर के बांसगांव थाना क्षेत्र स्थित गांव से महिला कांस्टेबल सहित चार लोगों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। पूछताछ में बड़ा खुलासा सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली के रहने वाला देवेंद्र प्रताप सिंह की दोस्ती श्रावस्ती में महिला कांस्टेबल के पद पर तैनात पिंकी सोनकर से फेसबुक के माध्यम से हुई। देवेंद्र प्रताप ने खुद को एक पार्टी का बड़ा नेता बताया था और अपनी पहुंच विभिन्न पार्टियों और विभागों में बताई थी। पिंकी उसकी इसी बात से बेहद प्रभावित थी, और उसने अपने गांव के कुछ अभ्यर्थियों को पुलिस में नौकरी दिलाने के लिए 20-20 लाख रुपए में सौदा तय किया था। इसी एवज में गुरुवार को देवेंद अपने एक साथी जिसे अपना पर्सनल सुरक्षा गार्ड बताया था और गाड़ी के ड्राइवर के साथ किराए की गाड़ी जिस पर भारत सरकार लिखा हुआ था, उसे लेकर अभ्यर्थियों से पैसा वसूलने पहुंचा था।
ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची थी लेकिन इसके पहले कुछ अभ्यर्थी जिनका एडमिट कार्ड पिंकी के मोबाइल में मिला था वह उसके घर पर ही मौजूद थे। जैसे ही पुलिस के पहुंचने की सूचना उन्हें मिली, सभी पीछे के रास्ते से भाग गए। लेकिन पिंकी के पैर में फैक्चर होने के कारण वह नहीं निकल पाई। पिंकी सहित देवेंद्र प्रताप सिंह और उसके दो अन्य साथियों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था।
उनसे पूछताछ की गई जिसमें यह मामला खुलकर सामने आया है। पुलिस के अनुसार ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। पिंकी सोनकर और मुख्य आरोपी देवेंद्र प्रताप सिंह को थाने लाया गया जहां उस्ताद के बाद जो मामला खुलकर सामने आया है उसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे।
बांसगांव थाना प्रभारी के अनुसार महिला कांस्टेबल पिंकी सोनकर श्रावस्ती में तैनात है। इस दौरान फेसबुक पर उनकी दोस्ती दिल्ली में रहने वाले देवेंद्र प्रताप सिंह से हुई थी जो खुद को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और अपनी पहुंच अन्य विभागों में बताता था। पिंकी के अनुसार उसकी बातों से प्रभावित होकर उस पर विश्वास किया और अपने गांव के कुछ युवकों और परिचितों को पुलिस भर्ती में नौकरी दिलाने के लिए 20-20 लाख रुपए में सौदा तय किया था।
इसके लिए एडवांस में 50-50 हजार रुपए भी लिए थे। पिंकी और देवेंद्र की मोबाइल डिटेल निकालने के बाद कई बातें खुलकर सामने आई है। इसमें कई अभ्यर्थियों से उनकी चैटिंग और अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले हैं। जिसके आधार पर यह तय हुआ है कि इन लोगों ने नौकरी लगवाने की एवज में युवकों को फसाने का काम किया है। दोनों को शुक्रवार के दिन सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया और स्कॉर्पियो गाड़ी को सीज कर दिया गया है।

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