आजादी के 75 साल बाद भी इस गांव में सड़क नहीं, ग्रामीणों ने किया जल सत्याग्रह

नीमच,(मध्य प्रदेश)। देश की आजादी को 75 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। मध्य प्रदेश के कई इलाकों में ग्रामीणों को आज भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बड़े शहरों में एक तरफ जहां एक्सप्रेसवे और इलेक्ट्रिक रोड बनाए जा रहे हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को एक साधारण सड़क भी नसीब नहीं हो रही है। एमपी के नीमच जिले में इन्हीं मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों को आंदोलन तक करना पड़ रहा है। नीमच जिले के मनासा तहसील के अंतर्गत मालाहेड़ा से कुणीखम्मा गांव तक सड़क नहीं है। ग्रामीण पुलिया और सड़क नहीं होने से परेशान हैं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लाख मिन्नतों के बावजूद जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो उन्हें जल सत्याग्रह के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बुधवार को ग्रामीण कई घंटे तक नदी के पानी में बैठे रहे।
दरअसल गांव मालाहेड़ा से कुणिखम्मा को जोड़ने वाला रास्ता कच्चा है। इस रास्ते में एक नदी भी आती है जिस पर पुलिया नहीं है। इससे ग्रामीणों को बरसात में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी तब महसूस होती है जब गर्भवती महिलाओं और बुजुर्ग लोगों को चिकित्सालय पहुंचाना होता है। इन तमाम समस्याओं के मद्देनजर ग्रामीणों ने शासन प्रशासन को जगाने के उद्देश्य से नदी में उतर कर जल सत्याग्रह किया और घंटों तक नदी में बैठे रहे।
ग्रामीण इस बात से ज्यादा आक्रोशित हैं कि वे इस बारे में कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से लेकर आला अधिकारियों तक को अवगत करा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों के जल सत्याग्रह की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण भी आंदोलन स्थल पर पहुंचे। इस संबंध में प्रशासन को भी जानकारी हुई और मौके पर तहसीलदार श्रद्धा त्रिवेदी, पुलिस के साथ पहुंची। उन्होंने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर व उचित कार्रवाई का भरोसा देकर आंदोलन खत्म कराया और उन्हें नदी से बाहर निकाला।

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