उत्तरकाशी में तबाही के बाद बनी 3 किमी लंबी झील

1000 से ज्‍यादा लोग चिनूक हेलीकॉप्‍टर से निकाले गए

उत्तरकाशी/उत्तराखंड। उत्तरकाशी में मलबे ने भागीरथी नदी की धारा को बदलकर हर्षिल में एक झील बना दी है। करीब 3 किमी लंबी झील का पानी धीरे धीरे निकल रहा है। लेकिन मलब और जमा होता रहा तो खतरा बढ़ सकता है। इस बीच, धराली के आसपास के इलाकों से लोगों को निकालने के लिए शनिवार को भी कई हेलीकॉप्टर उड़ान भरते नजर आए। बचाव अभियान पांचवें दिन भी जारी रहा। अब तक 1000 से अधिक लोगों को हवाई मार्ग के जरिये निकाला गया है।
फिलहाल सड़क संपर्क में सुधार और प्रभावित लोगों को भोजन के पैकेट उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। एसडीआरएफ का श्वान दस्ता खीर गंगा में हुए विनाशकारी भूस्खलन के बाद लापता लोगों की तलाश में मलबे से भरी जर्जर इमारतों में भटकता दिखा। भूस्खलन ने धराली बाजार को तहस-नहस कर दिया और होटल और होमस्टे समेत अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा ले गया जिससे कई लोगों की मौत हो गई।
एसडीआरएफ श्वान दस्ते और पीड़ितों का पता लगाने वाले ‘थर्मल इमेजिंग’ कैमरों जैसे अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से क्षतिग्रस्त इमारतों में गहन खोज करके धराली में मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहा है। उत्तराखंड के डीजीपी दीपम सेठ ने प्रभावित इलाकों का मौके पर निरीक्षण किया। उन्‍होंने बताया कि फंसे हुए लोगों को तेजी से निकालने के अलावा, हमें लापता लोगों की खोज और बचाव पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। जिला प्रशासन ने इस त्रासदी में चार लोगों की मौत, दो शव बरामद होने और आपदा के बाद से 49 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है।
भारतीय वायुसेना के चिनूक और एआई-17 हेलीकॉप्टर के अलावा उत्तराखंड नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के कई हेलीकॉप्टर ने जिले के विभिन्न स्थानों पर शरण लिए हुए लोगों को बचाने के लिए सुबह से ही उड़ानें भरनी शुरू कर दीं। लोगों को निकालने का काम बुधवार को शुरू होने के बाद से शनिवार शाम तक धराली और हर्षिल के आसपास से 1,000 से अधिक लोगों को हवाई मार्ग से निकाला गया है। हर्षिल स्थित एक सैन्य शिविर भी अचानक आई बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गया था और उसके नौ जवान लापता हो गए थे।

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