दिव्यांग को मेट्रो स्टेशन में नहीं दी गई एंट्री

नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा के स्कूलों को बम से उठाए जाने की धमकी के बाद सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता हो गई। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क मोड में रही। तंत्र को कसा गया। मोटर से चलने वाले व्हीलचेयर का उपयोग कर रही एक दिव्यांग महिला को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने ब्लू लाइन के सेक्टर 16 मेट्रो स्टेशन के चेक-इन क्षेत्र के बाहर रोक दिया। सीआईएसएफ कर्मियों और दिल्ली मेट्रो की ओर से उनकी तरफ से उपलब्ध कराए गए व्हीलचेयर पर स्विच करने के लिए कहा गया। 42 वर्षीय अंजू बेनीवाल की परेशानी बढ़ गई। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से पूछा कि वह अपने गंतव्य तक पहुंचने के बाद अपना निजी व्हीलचेयर नहीं रहने पर क्या करेंगी। इस पर सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि ई-व्हीलचेयर के साथ वह ट्रेन में नहीं चढ़ सकती हैं।
पोलियो से पीड़ित दिव्यांग अंजू ने कहा कि अगर मुझे अपनी इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर को छोड़कर डीएमआरसी की ओर से उपलब्ध कराई गई दूसरी व्हीलचेयर पर जाना पड़े, तो यात्रा पूरी होने के बाद मेरा क्या होगा? डीएमआरसी मुझे स्टेशन के बाहर व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं कराएगा। इस स्थिति में मैं आगे यात्रा कैसे करूंगी? हालांकि, उनकी परेशानी का कोई समाधान नहीं निकल पाया।
अंजू बेनीवाल दिल्ली के मयूर विहार की रहने वाली हैं। वह एक पैरा तीरंदाज हैं। अंजू ने कहा कि सीआईएसएफ कर्मियों ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इससे वह हैरान रह गईं। उन्होंने कई बार मेट्रो में उसी व्हीलचेयर का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ। मैं दो साल से दिल्ली मेट्रो में अपनी व्हीलचेयर ले जा रही हूं। वह हाल ही में एक दुर्घटना में हाथ में लगी चोट के लिए एक डॉक्टर से मिलने के लिए हरियाणा के बहादुरगढ़ जा रही थी।
अंजू को कैब से बहादुरगढ़ की बहुत महंगी यात्रा करनी पड़ी। सुबह करीब 11 बजे सेक्टर 16 पहुंची अंजू ने कहा कि मैंने लगभग एक घंटे तक सीआईएसएफ कर्मियों से मुझे स्टेशन में जाने देने की विनती की, लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी। उन्होंने कहा कि मैं निर्भर होने में विश्वास नहीं करती, लेकिन इस अनुभव ने मुझे तोड़ दिया है। मैंने सोचा था कि कोई आएगा और स्टेशन के बाहर मेरी ओर से बात करेगा, लेकिन किसी ने ऐसा नहीं किया। मैंने क्षेत्र के अन्य सुरक्षा कर्मियों से भी मदद करने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने भी इनकार कर दिया। वह कई वर्षों से नोएडा स्टेडियम में अभ्यास कर रही हैं।
एसोसिएशन फॉर डिसेबल्ड पीपल के महासचिव प्रदीप राज ने कहा कि उन्होंने अंजू को दो साल पहले व्हीलचेयर प्रदान की थी। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्लभ है कि इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर वाले लोगों को मेट्रो में यात्रा करने की अनुमति नहीं है। हमने अपने कई पैरा खिलाड़ियों को ये व्हीलचेयर प्रदान की हैं। उनमें से कुछ ने सीआईएसएफ सुरक्षाकर्मियों द्वारा उन्हें रोकने की शिकायत की है, लेकिन उन्होंने उन्हें यात्रा करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, अंजू को अत्यधिक दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा। हमारा संगठन अंजू का मामला विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम के तहत विकलांग व्यक्तियों के मुख्य आयुक्त के पास दर्ज करवाएगा।
सीआईएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर का डिजाइन ई-बाइक जैसा दिखता है, जिससे गड़बड़ी हो सकती है। मेट्रो में ई-बाइक की अनुमति नहीं देने के स्पष्ट निर्देश हैं। अधिकारी ने कहा कि हमारे सुरक्षाकर्मियों को पूरी तरह से जांच करनी चाहिए थी और आवश्यकताओं को देखना चाहिए था। हमें हाई अलर्ट पर रहने के लिए कहा गया था। हाल ही में, दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों (बुधवार को) सहित अन्य इलाकों में बम की धमकियां मिली हैं। सुरक्षा कर्मियों का इरादा अंजू को कोई असुविधा पहुंचाना नहीं था। जिस व्हीलचेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था वह तीन टायरों वाली एक बड़ी व्हीलचेयर थी, जो एक ई-स्कूटर की तरह थी। इसे स्कैन नहीं किया जा सका।
अधिकारी ने कहा कि बम की धमकी वाले मेल के कारण सीआईएसएफ कर्मचारियों को हाई अलर्ट पर रहने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि हमारे सुरक्षा उपकरणों के माध्यम से स्कैन न की जा सकने वाली किसी भी चीज की अनुमति न दी जाए। यहां तक कि व्हीलचेयर का अलग किया जा सकने वाला अगला हिस्सा भी स्कैन करने के लिए बहुत बड़ा था।

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