परमबीर सिंह आईपीएस के खिलाफ सीबीआई ने बंद किया केस

मुंबई/एजेंसी। ठाणे और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर, महाराष्ट्र होमगार्ड के पूर्व डीजी आईपीएस परमबीर सिंह, डीसीपी पराग मनेरे सहित 5 लोगों के खिलाफ दर्ज जबरन वसूली के मामले में सीबीआई ने ठाणे के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश की। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले को बंद करने का अनुरोध किया है। साथ ही, बताया है कि पर्याप्त सबूतों की कमी के चलते आरोप पत्र दायर नहीं किया गया। सीबीआई ने एक तरह से सिंह सहित सभी को कोपरी पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में क्लीनचिट दी है। सीबीआई ने कहा कि तथ्य और परिस्थितियां शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि नहीं करती हैं।सीबीआई (दिल्ली) के एसपी विकास कुमार और अडिशनल एसपी आर.एल. यादव ने मामले की छानबीन की अंतिम रिपोर्ट 30 दिसंबर 2023 को बनाई थी।
मुंबई स्थित सीबीआई के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अभिनव कृष्णा ने 18 जनवरी 2024 को ठाणे कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट को पेश की थी। ठाणे की कोपरी पुलिस ने भाईंदर निवासी रियल इस्टेट कारोबारी शरद अग्रवाल की शिकायत पर 23 जुलाई 2021 को आईपीसी 109, 110, 111, 113, 120 ब, 166, 177, 203, 323, 342, 364 अ, 384, 385, 388, 389, 420, 504 और 34 के तहत परमबीर सिंह, डीसीपी पराग मनेरे, संजय पुनमिया, सुनील जैन और मनोज घोटकर के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
शरद ने आरोप लगाया था कि उनके चाचा श्यामसुंदर अग्रवाल को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर कर उनसे साढ़े 4 करोड़ से अधिक की वसूली की गई थी। इसके अलावा, शिकायतकर्ता की मां के नाम रही 8 करोड़ रुपये की जमीन एक करोड़ में बेचने पर मजबूर किया गया था। अग्रवाल ने दावा किया था कि आधी राशि आयुक्त के सरकारी आवास पर ली थी। श्यामसुंदर 2016 में फर्जी यूएलसी के मामले में गिरफ्तार हुए थे। 2021 में कोपरी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज होने के 2 दिन पहले सिंह सहित अन्य सभी लोगों के खिलाफ मुंबई की मरीन ड्राइव पुलिस में भी इसी तरह का मामला दर्ज किया गया था।
श्यामसुंदर और पुनमिया का कनेक्शन
सीबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि पूनमिया, जैन और घोटकर को उस समय गिरफ्तार किया गया था। सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में मामले के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि श्यामसुंदर और उनके भतीजे शरद और शुभम का मीरा रोड और भाईंदर में कंस्ट्रक्शन व्यवसाय था। अग्रवाल का अपने पूर्व बिजनेस पार्टनर पुनमिया के साथ 2011 से विवाद चल रहा था, जिसे लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में उनके बीच 18 जनवरी 2017 को समझौता हुआ था। हालांकि, अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि उन पर समझौते को लेकर दबाव डाला गया था। इसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था, जो पुराने विवाद को एक बार फिर से खोलने जैसा है।
सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि हाई कोर्ट में हुए समझौते के गवाहों ने शिकायतकर्ता के आरोप का समर्थन नहीं किया और स्पष्ट किया है कि समझौता बिना किसी दबाव के हुआ था। यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि किसी भी स्वतंत्र साक्ष्य से नहीं होती है। घटना के लगभग 5 साल का समय बीतने के बाद 2021 में शिकायत दर्ज की गई। इसके अलावा, शिकायतकर्ता ठाणे में कथित बैठकों और मांगे गए पैसे की डिलीवरी के लिए सही तारीख, जगह और समय आदि नहीं बता सका। सीबीआई ने कहा है कि घटना और शिकायत के बीच लंबा समय बीतने के चलते सचाई का पता लगाने में सहायक साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। यह स्पष्ट नहीं हुआ कि पुलिस में श्यामसुंदर ने शिकायत खुद क्यों नहीं दर्ज कराई। सीबीआई ने बताया है कि अग्रवाल ने कोर्ट में हुए समझौते का सम्मान नहीं किया। कोपरी पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले के आरोप मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले के आरोपों की महज पुनरावृत्ति हैं।

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