गुजरात में 4 दिन के ब्रेन डेड बच्चे के अंगों ने 6 शिशुओं को दी जिंदगी

सूरत/गुजरात। सूरत ने अंगदान के इतिहास में नई मिसाल पेश की है। एक नवजात बच्चा अपनी मौत से पहले छह लोगों को जीवनदान दे गया। जन्म के बाद 111 घंटे तक जीवित रहे बच्चे ने दुनिया छोड़ने से पहले छह लोगों को जिंदगी दे दी। सूरत में जन्म के बाद एक नवजात बच्चे को डॉक्टरों के ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इसके बाद बच्चे के परिजनों ने उनके अंगों को डोनेट करने का फैसला किया है। बच्चे की दो किडनी, लीवर और आंखों को दान किया गया। सूरत के इस बच्चे के माता-पिता ने सच में अंगदान महादान को चरितार्थ कर दिया।
छोटी उम्र में अंगदान
जानकारी के अनुसार सूरत के संघानी परिवार ने एक नवजात बच्चे को जन्म दिया था। जन्म के बाद बच्चे में कोई हलचल नहीं हुई। डॉक्टरों ने उसे अपनी निगरानी में रखा और 111 घंटे तक सुपरविजन के बाद बच्चे को ब्रेन डेड घोषित किया। जन्म के वक्त बच्चे के रोने की आवाज भी नहीं आई। बच्चे को ब्रेनडेड घोषित किए जाने के बाद शहर की जीवन दीप ऑरगन डोनेशन संस्था ने परिवार से संपर्क किया और परिवार को अंगदान के लिए राजी किया, हालांकि संघानी परिवार के यह काफी आसान नहीं था, लेकिन आखिर में परिवार में दूसरे लोगों को नई जिंदगी देने का फैसला किया। इसके बाद अंगदान की तैयारी की गई। संस्था की मानें तो यह संघानी परिवार ने अपने 4 दिन के नवजात शिशु के अंगों को दान करके कीर्तिमान बनाया है। इतनी कम उम्र में अंगदान पहले कभी नहीं हुआ है। यह अंगदान भारत के इतिहास में दर्ज हुआ है। नवजात परिजनों ने अब तक बच्चे का नाम नहीं रखा था।
देशभक्ति है अंगदान करना
सूरत में अंगदान का यह मामला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के दौरे के बाद सामने आया है। इसी हफ्ते सूरत के दौरे में मोहन भागवत ने कहा था कि अंगदान करना देशभक्ति का प्रतीक है। संघानी परिवार ने अपने नवजात शिशु के जब अंगों को दान किया तो हॉस्पिल परिसर में भारत माता की जय के नारे भी लगे। डॉक्टरों का कहना है कि नवजात शिशु के अंगों से 8 से 10 महीने के बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकेगी। शिशु के अंगों को इस उम्र के बच्चों में लगाया जा सकेगा। शिशु के अंग इस उम्र के बच्चों में लगने के ग्रो कर जाएंगे।

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