इंदिरा गांधी ने इनके घर पर भेजी थी शील्ड, स्मारक नही बनने का विधवा को मलाल

सीतामढ़ी,(बिहार)। अंग्रेजों की गुलामी से देश को आजाद कराने वालों में सीतामढ़ी जिला के परिहार प्रखंड के सत्यनारायण सिंह भी शामिल थे। सरकार की फाइलों में अंग्रेजों से लोहा लेने वाले में परिहार प्रखंड के चार-चार लोगों का नाम दर्ज है। अब चारों स्वतंत्रता सेनानी नही है। उनका निधन हो चुका है। चारों की विधवा को केंद्र और राज्य सरकार से अलग-अलग पेंशन मिलता है। फिलहाल बात करते है स्वतंत्रता सेनानी सत्यनारायण सिंह की। अंग्रेजों के खिलाफ छेड़े गए आंदोलन में सत्यनारायण सिंह की भूमिका की याद कर गांव की नही, बल्कि प्रखंडवासी आज भी गर्व करते है। लोग उनके संघर्षों को भूले नही है। सत्यनारायण सिंह प्रखंड के सिसौटिया गांव के लाल थे।
आजादी की 25 वीं वर्षगांठ पर सम्मानित
देश की आजादी की 25 वीं वर्षगांठ पर पूरे भारत के बहुत सारे स्वतंत्रता सेनानियों को ‘ताम्रपत्र’ भेंट कर सम्मानित किया गया था। सम्मानित होने वालों में एक सत्यनारायण सिंह भी शामिल थे। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने डीएम के माध्यम से सत्यनारायण सिंह के देश की आजादी में दिए गए योगदानों का उल्लेख किया हुआ ‘ताम्रपत्र’ भेजा गया था। उनकी विधवा चंद्रकला देवी सहेज कर उक्त तामपत्र को रखी हुई है। पति के संघर्षों पर आज भी फक्र करतीं है। 98 वर्ष उम्र पार कर चुकी चंद्रकला देवी को संतोष इस बात का है कि दोनों सरकारें पेंशन देती है, लेकिन अफसोस इसका है कि राज्य सरकार स्वतंत्रता सेनानी का स्मारक नही बनवा सकी। ताकि युवा पीढ़ी को आजादी के दीवानों से प्रेरणा मिल सके और वे देश के हित में अपना योगदान दे सके।
नही बन रहा आश्रित प्रमाण-पत्र
राज्य सरकार स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों, पौत्र और पौत्रियों को आरक्षण देने का प्रावधान कर रखी है, पर यह संभव नही हो पा रहा है। चंद्रकला देवी के परिजन के अनुसार, आश्रित प्रमाण-पत्र बनने के बाद लाभ मिल सकता है। यह प्रमाण-पत्र डीएम के स्तर से बनता है। बताया कि प्रमाण-पत्र बनवाना काफी टेढ़ी खीर है। काफी मशक्कत करने के बाद भी उक्त प्रमाण पत्र निर्गत नही किया जा सका है। स्वतंत्रता सेनानी सत्यनारायण सिंह को एक पुत्र और एक पुत्री है। पुत्र वर्तमान में बिहार सरकार के अधिकारी है।

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