दिल्ली में ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत, पुलिस फिर से अपनाएगी पुराना तरीका
There will be relief from traffic jam in Delhi, police will adopt the old method again

नई दिल्ली। दस साल से यातायात जाम को लेकर दिल्ली पुलिस की दिल्ली सरकार व सरकार के संबंधित विभागों से आपसी सामंजस्य न बन पाने के कारण समस्या का हल नहीं हो पा रही थी। मगर, दिल्ली में अब डबल इंजन की सरकार बन जाने पर दिल्ली पुलिस की दिल्ली सरकार से बेहतर सामंजस्य हो जाने के कारण जाम की समस्या का काफी हद तक हल निकालने की काेशिश की जा रही है।
रोड इंजीनियरिंग आदि को लेकर यातायात पुलिस की तमाम संबंधित विभागों से पिछले कई दिनों से लगातार बैठकें हो रही हैं। इसी कड़ी में यातायात पुलिस ने सबसे कारगर प्रयास के तौर पर पहले पीक आवर में जाम को संभालने के लिए लाउड हेलर का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है।
यातायात पुलिस का यह पुराना परंपरागत तरीका है जिसे इस तकनीकी युग में बंद कर दिया गया था, लेकिन अब फिर से पुलिस इस परंपरागत तरीके को अपनाने जा रही है। विशेष आयुक्त यातायात अजय चौधरी के मुताबिक सुबह और शाम पहले पीक आवर में बाइक सवार यातायात कर्मी लाउड हेलर का इस्तेमाल करेंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसे मथुरा रोड, आईआईटी से मोदी मील, धौलाकुआं से गुरुग्राम बॉर्डर, महरौली-बदरपुर रोड आदि पर केवल तीन-तीन कैरिज्वे में इस तरह की व्यवस्था जल्द शुरू करेगी।
प्रयोग अगर सफल हुआ तब पूरी दिल्ली में इस तरह की व्यवस्था शुरू की जाएगी। यातायात पुलिस के पास हजारों की संख्या में लाउड हेलर हैं। बाइक पर सवार होकर दो-दो यातायात कर्मी लाउड हेलर लेकर गश्त करेंगे। पुलिसकर्मियों को जहां कोई गाड़ी रोककर खड़ा होते, वाहन चलाने के दौरान मोबाइल का प्रयोग करते नजर पड़ेगी।
सड़कों पर अतिक्रमण दिखेगा, वाहनों के ब्रेक डाउन होने का पता चलेगा तब पुलिसकर्मी लाउड हेलर से वाहन चालकों को निर्देश जारी करेंगे। यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर उन्हें नसीहत देंगे। पुलिस अधिकारी का कहना है कि यह बहुत कारगर प्रयोग साबित हो सकता है। धीरे-धीरे गश्त करने वाले पुलिसकर्मियों को चालान काटने की अनुमति दे दी जाएगी।
एडिशनल पुलिस आयुक्त सत्यवीर कटारा का कहना है कि जाम को खत्म करने के लिए हर संभव रणनीति तैयार की जा रही है। सड़कों से अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं। 66 दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत रेहड़ी पटरी वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
सभी सड़कों व खासतौर पर बोटलनेक वाले जगहों पर संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना किया जा रहा है। वहां रोड इंजीनियरिंग को लेकर मंथन किया जा रहा है। जिस विभाग के जिम्मे जिस काम के बारे में पता चल रही है उन्हें ठीक करने की जिम्मेदारी सौंपी जा रह है।




