दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का किया भंडाफोड़
यूके भेजी जाने वाली साइकोट्रोपिक टैबलेट जब्त

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस सिंडिकेट द्वारा यूके एक्सपोर्ट किए गए कंटेनर से करीब नौ करोड़ कीमत की 18,47,400 साइकोट्रोपिक टैबलेट जब्त की गईं है। आरोपितों में एक विष्णु दत्त शर्मा ने कंटेनर से घरेलू सामान यूके एक्सपोर्ट करने पर उसमें ट्रामाडोल और अन्य प्रतिबंधित गोलियों के 32 डिब्बे छिपा दिए थे। सूचना मिलने पर क्राइम ब्रांच ने कंटेनर को पकड़ने के लिए कस्टम अधिकारियों के साथ समन्वय कर शिपमेंट यूके में वितरित नहीं होने दिया और उसे वापस भारत मंगवा लिया गया। टी-थ्री टर्मिनल, मुंद्रा पोर्ट, गुजरात में कंटेनर के वापस पहुुंचने पर उसे जब्त कर लिया गसा।
डीसीपी विक्रम सिंह के मुताबिक सात अक्टूबर को गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने महक अपार्टमेंट, मदनपुर खादर एक्सटेंशन-एक, सरिता विहार से मोहम्मद आबिद को गिरफ्तार कर लिया था। यह भी पढ़ें- दिल्ली में अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का
तलाशी में 54,000 ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट (ट्रेकेन-100) (वज़न: 14.472 किलो) बरामद की गई। उससे पूछताछ और टेक्निकल सर्विलांस के दौरान, गैर-कानूनी फार्मास्यूटिकल नेटवर्क की सप्लाई चेन के बारे में पता चला। इसके बाद कंटेनर टी-3 टर्मिनल, मुंद्रा पोर्ट, गुजरात पर पहुंचकर पुलिस ने कस्टम एसआइटी की उपस्थिति में वेयरहाउस नंबर दो मुंद्रा पोर्ट पर छापा मार साइकोट्रोपिक पदार्थों की भारी बरामदगी।
आरोपितों की प्रोफाइल
मोहम्मद आबिद, मदनपुर खादर का रहने वाला है। पहले जानवरों के चारे का बिजनेस था। बाद में साइकोट्रोपिक चीज़ों के गैर-कानूनी धंधे में शामिल हो गया जावेद खान, कस्टम्स हाउस एजेंट के तौर पर काम करता था, जो कंसाइनमेंट के डोक्यूमेंटेशन और क्लियरेंस का काम करता था।
लाजिस्टिक्स और कस्टम्स प्रोसीजर की अपनी जानकारी का फायदा उठाकर, उसने गैर-कानूनी फायदे के लिए प्रतिबंधित दवाओं की मूवमेंट में मदद की।
सुनील कुमार, समालका में “प्रहलाद लाजिस्टिक्स” नाम से वेयरहाउस चलाता है। अपने वेयरहाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजनेस आपरेशन का इस्तेमाल करके, उसने संगठित नेटवर्क के हिस्से के तौर पर प्रतिबंधित सामान के स्टोरेज और आगे की मूवमेंट में मदद की।
विष्णु दत्त शर्मा एमसीए है। वह आठ सालों से एक्सपोर्टर के तौर पर काम कर रहा था, जो मुख्य रूप से भारत से यूनाइटेड किंगडम में घरेलू सामान एक्सपोर्ट करता था। जांच के दौरान पता चला कि उसने अपने एक्सपोर्ट बिजनेस प्लेटफार्म का गलत इस्तेमाल करके सही कंसाइनमेंट की आड़ में साइकोट्रोपिक पदार्थों को छिपाने और भेजने का काम किया।
विकास सिंह बीएससी ग्रेजुएट है और “क्विक कार्गो कूरियर सर्विस” के नाम से कोरियर कंपनी चलाता था। कोरियर और लाजिस्टिक्स नेटवर्क का इस्तेमाल करके, उसने सप्लाई चेन के अंदर गैर-कानूनी दवाइयों के कंसाइनमेंट को कोआर्डिनेट करने और ट्रांसपोर्ट करने में मदद की।
| क्र.सं. | दवाई का नाम | कुल टैबलेट | वजन (किग्रा) | तारीख |
|---|---|---|---|---|
| 1 | ट्रामाडोल (ट्रेकेन-100) | 54,000 | 14.472 | 07 अक्टूबर |
| 2 | अल्प्राजोलम (अल्पजार 1 MG) | 13,80,000 | 404.340 | 16 फरवरी |
| 3 | अल्प्राजोलम (अल्पज़ 1 MG) | 1,95,800 | 48.950 | 16 फरवरी |
| 4 | ट्रामाडोल (ट्रेकेन-100) | 94,000 | 25.568 | 16 फरवरी |
| 5 | ट्रामाडोल (ट्रेकेम-100) | 41,600 | 10.940 | 16 फरवरी |
| 6 | ज़ोलपिडेम (ज़ोलट्रेट-10) | 30,000 | 11.340 | 16 फरवरी |
| 7 | नाइट्राज़ेपाम (नाइट्रोज़ेप-10) | 52,000 | 12.792 | 16 फरवरी |
| कुल योग: | 18,47,400 | 528.402 | – | |
कुल टैबलेट की संख्या: 18,47,400
कुल वजन: 528.402 किलोग्राम




