महाराष्ट्र में ई-रक्तकोष का डेली स्टॉक अपडेट नहीं करना पड़ा भारी, ब्लड बैंक पर लगा 12,72000 रुपये का जुर्माना

मुंबई/महाराष्ट्र। रक्त की उपलब्धता की जानकारी देने वाली वेबसाइट ई-रक्तकोष पर जानकारी न अपलोड करने वाले ब्लड बैंकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। राज्य के ऐसे कई ब्लड बैंकों पर 5 महीने में 12,72,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अक्सर अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को रक्त के लिए एक से दूसरे ब्लड बैंक के धक्के खाने पड़ते हैं। उन्हें यह पता भी नहीं होता है कि जिस ब्लड बैंक में वे जा रहे हैं, वहां उन्हें रक्त मिलेगा भी या नहीं। इसी के मद्देनजर सरकार ने ई-रक्तकोष वेबसाइट बनाई, जिस पर सभी राज्यों के ब्लड बैंकों को रोजाना ब्लड का स्टॉक, यानी कितना यूनिट, ग्रुप आदि की जानकारी अपलोड करनी होती है। इसका मूल उद्देश्य यह है कि जब भी मरीज को रक्त की आवश्कता हो और अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड न हो तो वह ई-रक्तकोष में जाकर सर्च कर सकते हैं कि किस ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध है। वे वहां फोन कर ब्लड रिजर्व करा सकते हैं और बाद में जा कर ला सकते हैं। ब्लड बैंकों का संचालन करनेवाली स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) को यह सुनिश्चित करना होता है कि राज्य की सभी प्राइवेट व सरकारी ब्लड बैंक रोजाना अपना स्टॉक इस पर अपलोड करें। यदि कोई ब्लड बैंक अपना स्टॉक अपलोड नहीं करता है तो उस पर प्रतिदिन 1000 रुपये फाइन लगाया जाता है।
आरटीआई कार्यकर्ता चेतन कोठारी द्वारा दायर की गई याचिका में यह खुलासा हुआ है कि कई ब्लड बैंक डेली स्टॉक अपडेट करने से चूकी हैं, जिसके चलते उन पर जुर्माना लगाया गया है। दिसंबर 2022 से लेकर अप्रैल 2023 तक राज्य के कई ब्लड बैंकों पर कार्रवाई कर 12,72,000 रुपये जुर्माना लगाया गया है।
अपारदर्शिता में कूपर ब्लड बैंक सबसे ऊपर
मुंबई के ब्लड बैंकों की बात करें तो कूपर ब्लड बैंक नियम के उल्लंघन के मामले में सबसे ऊपर है। कुल 121 दिन में से मात्र 25 दिन ही ब्लड बैंक ने ई-रक्तकोष पर ब्लड का स्टॉक अपलोड किया है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2022 में 11, जनवरी 2023 में 22, फरवरी में 6, मार्च में 27 बार और अप्रैल में 30 दिन डेली स्टॉक ई-रक्तकोष पर अपडेट नहीं किया।
आमदनी है जानकारी न देने का कारण
ई-रक्तकोष का उद्देश पारदर्शिता है, लेकिन ब्लड बैंक से जुड़े कुछ अधिकारियों के अनुसार कुछ ब्लड बैंकों को पारदर्शित रास नहीं आती है। इसका प्रमुख कारण है कि वेबसाइट पर यदि ब्लड स्टॉक अपडेट करते हैं तो वह ब्लड लेने आने वालों को यह नहीं कह सकते कि उनके पास ब्लड नहीं है। कई बार हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, सिकल सेल अनीमिया आदि को नियम अनुसार मुफ्त में रक्त देना होता है। ऐसे में यदि कोई मरीज या उसका रिश्तेदार ब्लड की उपलब्धता देखकर संबंधित ब्लड बैंक पर जाता है तो उस ब्लड बैंक को उसे मुफ्त में ब्लड देना होगा। इससे ब्लड बैंकों की आमदनी पर भी असर पड़ता है। इसलिए कई बार ब्लड बैंक अपने स्टॉक की जानकारी साझा नहीं करते हैं।




