पराठा और पानी की बोतल का पेमेंट, सैफ अली खान के हमलावर तक पहुंची मुंबई पुलिस
Mumbai police reached Saif Ali Khan's attacker after paying for paratha and water bottle

- सैफ अली खान के हमलावर को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया
- गूगल पे के माध्यम से किए गए यूपीआई पेमेंट ने दी पुलिस को टिप
- आरोपी ने टीवी पर अपनी तस्वीरें देखकर भागने का फैसला किया
मुंबई/एजेंसी। सैफ अली खान के हमलावर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की कई टीमें लगी थीं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उपायुक्त दीक्षित गेदम ने आरोपी की गिरफ्तारी की पूरी कहानी बताई। इस गिरफ्तारी में पुलिस को जो बड़ी टिप मिली, वह थी वर्ली में सेंचुरी मिल के पास एक स्टॉल पर पराठे और पानी की बोतल खरीदने के लिए गूगल पे (जी पे) के माध्यम से किया गया यूपीआई पेमेंट। इस पेमेंट के चलते मुंबई पुलिस शनिवार देर रात मोहम्मद शरीफुल इस्लाम (30) के पास पहुंची।सूत्रों ने कहा कि फोन भुगतान के बाद पुलिस को आरोपी का मोबाइल नंबर मिला। इस मोबाइल नंबर की लोकेशन ठाणे में लेबर कैंप के पास एक घने मैंग्रोव क्लस्टर में मिली। जल्द ही, लगभग 100 पुलिस कर्मियों ने घटनास्थल पर तलाशी शुरू कर दी।
दीक्षित गेदम ने बताया कहा, ‘वहां तलाशी लेने के बाद, पुलिस दल लगभग मौके से चला गया था, जब उन्होंने एक बार फिर जांच करने का फैसला किया। जैसे ही उन्होंने फिर से देखा। मोबाइल की रोशनी अचानक ऐसी जगह पर पड़ी, जहां उन्हें लगा कि कोई जमीन पर सो रहा है। जैसे ही एक अधिकारी पास आया, वह व्यक्ति उठा और भागने लगा। उसे जल्द ही पकड़ लिया गया।’
पुलिस अफसर ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ के दौरान, आरोपी ने हमें बताया कि जब उसने टीवी और यूट्यूब पर अपनी तस्वीरें देखीं तो वह डर गया। वह भागकर ठाणे चला गया। वह वहां एक बार में काम करता था और इलाके को जानता था। पुलिस ने बांद्रा रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी फुटेज को ट्रैक करने और दादर स्टेशन के बाहर एक दुकान पर उसका पता लगाने की कोशिश की थी, जहां से उसने एक मोबाइल कवर खरीदा था। हालांकि उसने यहां कैश पेमेंट किया था। उसके बाद पुलिस सीसीटीवी टेक करते हुए कबूतरखाना और फिर वर्ली पहुंचे। जैसे ही पुलिस ने वर्ली इलाके में फुटेज खंगालना शुरू किया, उन्होंने संदिग्ध को सेंचुरी मिल के पास एक दुकान पर कुछ समय के लिए पड़ा पाया।
सूत्रों ने कहा, ‘फुटेज में उसे दुकान चलाने वाले व्यक्ति के साथ दो बार बातचीत करते देखा गया था। क्राइम ब्रांच की टीमों को जल्द ही अलर्ट कर दिया गया और उन्होंने पाया कि स्टाल चलाने वाला व्यक्ति नवीन एक्का कोलीवाड़ा के पास रह रहा था। सूत्रों ने कहा, ‘इस संदेह पर कि आरोपी एक्का का दोस्त था, पुलिस की सात टीमों ने शनिवार को वर्ली-कोलीवाड़ा इलाके की तलाशी ली, जिसमें विक्रेताओं को आरोपी की तस्वीरें दिखाई गईं। पुलिस ने जनता कॉलोनी में जयहिंद मित्र मंडल के एक घर में एक्का के पते का पता लगाया, जहां वह चार या पांच अन्य श्रमिकों के साथ रह रहा था। लेकिन जब वे मौके पर पहुंचे तो घर में ताला लगा हुआ था। इसके बाद पुलिस ने मकान मालिक राजनराजायन प्रजापति से संपर्क किया। पुलिस को एक्का का मोबाइल नंबर प्रजापति के बेटे विनोद के माध्यम से मिला। उन्होंने विनोद को संदिग्ध की एक तस्वीर भी दिखाई। उन्होंने पुष्टि की कि एक्का एक किरायेदार था, लेकिन वह आरोपी की पहचान नहीं कर सका।
लेबर कैंप के ठेकेदार तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने एक्का का पता लगाया। उसने पुलिस को बताया कि संदिग्ध ने पराठे और पानी की बोतल के लिए यूपीआई भुगतान किया था। विनोद ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘पुलिस को हमारे माध्यम से आरोपी का मोबाइल नंबर मिला क्योंकि उसने जी पे के माध्यम से पैसे का भुगतान किया था। मोबाइल नंबर एक महत्वपूर्ण मोड़ था क्योंकि यह पुलिस को ठाणे के कसारवडावली में श्रम शिविर और अमित पांडे नाम के एक ठेकेदार तक ले गया, जिसने कुछ महीने पहले आरोपी को काम पर रखा था।’ अधिकारी ने कहा, ‘लगभग 20 टीमें मौके पर पहुंची और संदिग्ध की तलाश शुरू की। लेकिन वह मौके से फरार हो गया था और शनिवार रात करीब 10 बजे उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया था। यही वह समय था जब शिविर के पास मैंग्रोव में चला गया था। डीसीपी नवनाथ धावले के नेतृत्व में टीम ने तलाशी शुरू की।


