बीट पुलिसिंग की मजबूत बुनियाद, 2.64 लाख नागरिक बने गाजियाबाद पुलिस की डिजिटल आंख

गाजियाबाद। साल 2025 में गाजियाबाद पुलिस ने गांवों और शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा को सिर्फ व्यवस्था नहीं, साझेदारी का माडल बना दिया। अप्रैल से बीट पुलिसिंग लागू होने के बाद पुलिस आम लोगों के सीधे संपर्क में व्यापक स्तर पर आई। बीट स्तर पर बनाए गए जनता के वॉट्सएप ग्रुपों में 2.64 लाख नागरिकों का जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी अब पुलिस और जनता का सीधा संवाद बन चुका है।
गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में 24 अप्रैल को पुलिस आयुक्त जे रविंदर गौड ने बीट पुलिस प्रणाली लागू की गई थी। यह कमिश्नरेट बनने के बाद पहली बड़ी संरचनात्मक पुलिसिंग पहल थी। जिसका उद्देश्य कानून व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना रहा। इसके तहत पूरे जनपद को 2131 बीट में विभाजित किया गया।
नगर जोन में 640, ट्रांस हिंडन जोन में 693 और ग्रामीण जोन में 798 बीट निर्धारित की गईं। जमीनी निगरानी, सूचना संकलन और नागरिक सत्यापन कार्यों को अंजाम देने के लिये 941 बीट सब इंस्पेक्टर, 1431 बीट पुलिस अधिकारी की तैनाती की गई। बीटवार जिम्मेदारी तय होने के बाद गश्त की संख्या बढ़ी, सूचनाएं तेज हुईं और पुलिस की प्रतिक्रिया समयबद्ध हुई।
इसी व्यवस्था को सामुदायिक स्तर पर सशक्त करने के लिये बीट अधिकारियों द्वारा वाट्सएप जनसंवाद ग्रुप तैयार किये गये, जिनमें 2.64 लाख लोगों को जोड़ा गया। इन ग्रुपों में स्थानीय निवासी, व्यापारी, स्कूल-कालेज प्रतिनिधि और समाज के गणमान्य लोग शामिल हैं। जिनसे सुझाव, शिकायत और बीट सूचनाएं सीधे प्राप्त की जा रही हैं।
बीट स्तर पर कई उल्लेखनीय कार्य सामने आये। थाना क्रॉसिंग रिपब्लिक में बीट-9 में तैनात मुख्य आरक्षी अमित कुमार ने व्यापारियों के सहयोग से 32 आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगवाये और थाने को लाइव एक्सेस उपलब्ध कराया। अंकुर विहार थाने के मुख्य आरक्षी मनोज कुमार ने 22 अपराधियों का सत्यापन कर छह पर गुंडा अधिनियम और 15 पर बीएनएसएस की धारा 129 के तहत कार्रवाई कराई। इंदिरापुरम में मुख्य आरक्षी रमन मलिक ने 55 साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों और नागरिकों को सतर्क किया।

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