अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने खत्म किया 5 लाख प्रवासियों का कानूनी दर्जा

छोड़ना होगा मुल्‍क, इन 4 देशों के लोगों को झटका

  • ट्रंप प्रशासन ने पैरोल प्रोग्राम खत्म करने का फैसला लिया
  • 500,000 प्रवासियों को देश छोड़ने का अल्टीमेटम दिया
  • बाइडन प्रशासन पर पैरोल के गलत इस्तेमाल का आरोप

वॉशिंगटन/एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने पूर्व प्रेसीडेंट बाइडन के समय के पैरोल प्रोग्राम के तहत क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला से आए पांच लाख से ज्यादा प्रवासियों का कानूनी दर्जा खत्म करने का फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने नोटिस जारी करते हुए इसकी जानकारी दी है। इन प्रवासियों को 24 अप्रैल तक देश छोड़ने के लिए कहा गया है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि बाइडन प्रशासन में मानवीय पैरोल का गलत इस्तेमाल करते हुए इन लोगों को लाया गया। इसलिए अब इस प्रोग्राम में बदलाव किया गया है।अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) ने इस साल जनवरी में ही संकेत दिया था कि वह पैरोल प्रोग्राम को खत्म करेगा। इन प्रोग्राम के जरिए लाखों प्रवासियों को अस्थायी रूप से अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति मिली हुई थी। डीएचएस का कहना है कि बाइडन के समय मानवीय पैरोल प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल हुआ और करीब 15 लाख प्रवासियों को बिना सोचे-समझे देश में आने दिया गया। इसे ट्रंप के सत्ता में आने के पहले दिन ही रोका गया। अब यह कार्रवाई मानवीय पैरोल प्रोग्राम को उसके मूल उद्देश्य पर वापस लाएगी।
अमेरिका में 5 लाख से ज्यादा आप्रवासियों का कानूनी दर्जा खत्म करने के संबंध में डीएचएस यानी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी का आदेश 25 मार्च को पब्लिश होगा। इसके 30 दिन बाद संबंधित आप्रवासी अमेरिका में रहने का कानूनी अधिकार खो देंगे। यानी प्रवासियों को 24 अप्रैल तक अमेरिका छोड़ना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। यह उन लोगों के लिए बड़ा झटका है, जो इन प्रोग्राम के तहत अमेरिका में रह रहे थे।
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से करीब 5,30,000 आप्रवासी प्रभावित होंगे। ये अप्रवासी क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला के हैं। ये आप्रवासी जो बाइडेन के ह्यूमैनिटेरियन परोल प्रोग्राम का लाभ लेते हुए अमेरिका आए थे। इस योजना के तहत शुरू में अक्टूबर 2022 में वेनेजुएला के लोगों को लाया गया था। इसके बाद जनवरी 2023 में इसका विस्तार करते हुए क्यूबा, हैती और निकारागुआ के लोगों को भी शामिल किया गया। इन चारों देशों में मानवाधिकार की स्थितियां चिंताजनक हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button