आसाराम की जमानत पर भड़की दुष्कर्म पीडिता पहुंची सुप्रीम कोर्ट, बेल रद करने की उठाई मांग

नई दिल्ली/एजेंसी। एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर आसाराम की जमानत रद करने की मांग की है। दुष्कर्म के दोषी आसाराम को अक्टूबर में राजस्थान हाईकोर्ट और नवंबर में गुजरात हाईकोर्ट ने मेडिकल ग्राउंड पर जमानत दी थी।
पीड़िता के वकील, अल्जो जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आसाराम पूरे देश में घूम रहे हैं और गंभीर रूप से बीमार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगस्त में हाईकोर्ट ने एक मेडिकल बोर्ड बनाया था, जिसने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि आसाराम की हालत स्थिर है और उसे हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है।
जोसेफ ने यह भी दलील दी कि आसाराम अहमदाबाद, जोधपुर और इंदौर जैसी दूसरी जगहों पर घूम रहा है। वकील ने कहा कि आसाराम ऋषिकेश से महाराष्ट्र भी गया था। जोसेफ ने कहा कि आसाराम का जोधपुर में आयुर्वेदिक इलाज चल रहा है और उसे कोई बीमारी नहीं है। आसाराम अगस्त 2013 से जेल में है। उस पर जोधपुर के पास मनाई गांव में अपने आश्रम में 16 साल की लड़की से दुष्कर्म करने का आरोप है। पीडिता ने अपनी शिकायत में कहा था कि आसाराम ने उसे 15 अगस्त, 2013 की रात को अपने आश्रम में बुलाया था।
जोधपुर की एक कोर्ट ने 25 अप्रैल, 2018 को आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसके साथियों शरद और शिल्पी को भी इसी केस में कोर्ट ने 20 साल जेल की सजा सुनाई थी। 29 अक्टूबर को राजस्थान हाई कोर्ट ने मेडिकल ग्राउंड पर आसाराम को छह महीने की जमानत दी। आसाराम के वकील देवदत्त कामत ने दलील दी कि वह लंबे समय से बीमार है और जेल में उसका सही इलाज मुमकिन नहीं है। एक हफ्ते बाद, 6 नवंबर को, गुजरात हाई कोर्ट ने भी आसाराम को जमानत दे दी। उसके वकील ने बेंच के सामने राजस्थान हाई कोर्ट का ऑर्डर पेश किया और विचार के लिए कहा।

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