एलियन की सच्चाई जल्द आएगी सामने,तैयार हो रहा दुनिया का सबसे बड़ा कैमरा

लंदन/एजेंसी। हमारी धरती के बाहर भी कहीं जीवन है या नहीं? वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब दशकों से ढूढ़ने की कोशिश में लगे हुए हैं। दुनिया में कई लोगों ने एलियन के स्पेसशिप देखे जाने का दावा किया है, लेकिन ये बात भी उतनी ही सच है कि आज तक धरती पर किसी ने एलियन से संपर्क स्थापित नहीं किया है। हालांकि, शोधकर्ताओं का मानना है कि एलियन की खोज एक नए युग में प्रवेश कर सकती है। सुदूर अंतरिक्ष में एलियन की खोज के लिए शुरू किए दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक प्रोजेक्ट ब्रेकथ्रू लिसेन के वैज्ञानिकों का कहना है कि कई तकनीकी विकास ब्रह्मांड में खोज की दिशा बदलने वाले हैं।
ऑक्सफोर्ड में जुटेंगे दुनियाभर के वैज्ञानिक
गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, इन नवाचारों को लेकर वैज्ञानिकों के समूह के वार्षिक सम्मेलन में चर्चा होगी। सम्मेलन इसी सप्ताह ब्रिटेन में पहली बार ऑक्सफोर्ड में आयोजित किया जाएगा। इसमें खगोलविदों से लेकर प्राणीविदों तक कई सौ वैज्ञानिकों के भाग लेने की उम्मीद है। ब्रेकथ्रू लिसन के एक परियोजना वैज्ञानिक खगोलविद स्टीव क्रॉफ्ट ने कहा, ‘ऐसी अद्भुत तकनीकें हैं जो विकास के अधीन हैं, जैसे कि चिली, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में विशाल नई दूरबीनों का निर्माण, साथ ही साथ AI में विकास। वे एलियन सभ्यताओं को खोजने के हमारे तरीके को बदलने जा रहे हैं।’
चिली में तैयार हो रहा सबसे बड़ा कैमरा
इन नए उपकरणों में सैकड़ों रेडियो दूरबीनों से बना ‘स्क्वायर किलोमीटर ऐरे’ शामिल है, जो दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में तैयार किया जा रहा है। यह दुनिया की सबसे बड़ी रेडियो खगोल विज्ञान सुविधा होगा। इसके साथ ही चिली में वेरा रुबिन वेधशाला बनाई जा रही है, जो दुनिया का सबसे बड़ा कैमरा होगा। यह हर तीन या चार रातों में पूरे आकाश की तस्वीर बनाने में सक्षम होगा, जिससे लाखों नई आकाशगंगाओं और सितारों की खोज में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्टीव क्राफ्ट ने कहा कि दोनों सुविधाएं अगले कुछ वर्षों में अवलोकन शुरू करने के लिए तैयार हैं और दोनों ही ब्रेकथ्रू लिसन के लिए डेटा प्रदान करेंगी। इन विशाल सूचना समूहों के अध्ययन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल एलियन सभ्यताओं की खोज को अतिरिक्त शक्ति देगा। उन्होंने कहा, ‘अब तक हम एलियंस द्वारा उनके अस्तित्व का विज्ञापन करने के लिए जानबूझकर भेजे गए संकेतों की तलाश करने तक ही सीमित रहे हैं। नई तकनीकें इतनी संवेदनशील होने जा रही हैं कि पहली बार, हम जानबूझकर किए गए प्रसारणों के विपरीत अनजाने में किए गए प्रसारणों का पता लगाने में सक्षम होंगे।’

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