गाजियाबाद में साइबर ठगी में डिलिवरी बॉय समेत दो गिरफ्तार,साढ़े 24 लाख नकद बरामद

Two arrested including a delivery boy in Ghaziabad cyber fraud, 24.5 lakh cash recovered

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में साइबर फ्रॉड के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने साइबर ठगी करने में एक डिलिवरी बॉय समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया। डिलीवरी बॉय के पास से 24.35 लाख रुपये, पिस्टल, लैपटॉप, मोबाइल समेत अन्य सामान बरामद किया गया। पूछताछ में पता चला कि आरोपी व्यापार करने के नाम पर अपने परिचितों और जानकारों से खाते की डिटेल लेकर उनमें ठगी की रकम मंगवाते थे।महाराष्ट्र के एक शख्स से 65 लाख रुपये की ठगी की गई, उसका पैसा भी इन्हीं खातों में मंगवाया गया। जब इन खातों को फ्रीज कर दिया गया तो पीड़ितों को सचाई का पता चला। इसकी जांच करने पर दोनों आरोपी पकड़े गए। पुलिस को आशंका है कि दोनों ने कई लोगों से धोखाधड़ी की होगी। एसीपी कविनगर अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि लक्ष्य शर्मा, नितिन नेगी समेत पांच लोगों के खाते फ्रीज हो गए थे।
एसीपी कविनगर में बताया कि जब उन्होंने जानकारी जुटाई तो पता चला कि इन खातों में धोखाधड़ी का पैसा आया था। इस बारे में पुलिस से शिकायत की गई। पुलिस ने जांच की तो दो संदिग्धों के बारे में पता चला। इसके बाद संजयनगर निवासी साईं वैभव और राजनगर एक्सटेंशन निवासी निशांत को गिरफ्तार किया गया।
एसीपी ने कहा कि पकड़ा गया साईं वैभव डिलिवरी बॉय है और निशांत 12वीं पास है। साईं और निशांत के खिलाफ तीन-तीन मुकदमे दर्ज हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया कि दोनों सुमित और अंकित के साथ मिलकर साइबर फ्रॉड करते थे। सुमित और अंकित ठगी करते थे। ठगी की रकम मंगवाने के लिए वे दोनों अक्षित के साथ मिलकर आसपास के लोगों को अलग-अलग तरीकों से विश्वास में लेकर उनके बैंक खातों की जानकारी लेते थे। एसीपी ने कहा कि आरोपी फिर उन खातों में ठगी की रकम मंगवाते थे। खाता धारकों से ही रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे या नकद निकलवाकर खुद ले लेते थे। इसके बाद ठगी गई रकम को आपस में बांट लेते थे।
एसीपी ने बताया कि मामले में जांच करने पर सामने आया कि पीड़ितों के खाते में महाराष्ट्र के एक व्यक्ति से पॉलिसी के नाम पर ठगे गए 65 लाख रुपये कई बार में मंगवाए गए थे। जब लक्ष्य शर्मा, नितिन नेगी समेत अन्य लोगों के खाते फ्रीज हुए तो उन्हें धोखाधड़ी का पता चला और पुलिस से शिकायत की। एसीपी ने बताया कि गिरोह में सुमित, अंकित के अलावा अक्षित का नाम भी सामने आया है। सभी की तलाश की जा रही है। पिस्टल साईं के पास से बरामद हुई है। इस संबंध में भी जांच की जा रही है। आशंका है कि नकदी को इधर उधर ले जाने के दौरान अपनी सुरक्षा के लिए वह अवैध पिस्टल रखता था।
खाता खुलवाने के बाद मंगाते थे ठगी की रकम
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत लोगों को प्रशिक्षण दिलाने और उसकी स्कॉलरशिप के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनमें ठगी की रकम मंगवाने वाले गिरोह का नंदग्राम पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने गिरोह के दो शातिरों को गिरफ्तार किया है। शातिर लोगों को मौके पर तीन से चार हजार रुपये देकर योजना के नाम पर लाभ दिलाने का झांसा देते थे और फिर दस्तावेज लेकर खाते खुलवाकर उन्हें छत्तीसगढ़ के रहने वाले ठग को कुरियर कर देते थे।
एसीपी नंदग्राम पूनम मिश्रा ने बताया कि पकड़े गए शातिर नंदग्राम निवासी रवि चौपड़ा और मनीष है। रवि मूलरूप से छत्तीसगढ़ के कोरबा का रहने वाला है। इनके पास से अलग-अलग बैंकों के 21 डेबिट कार्ड, 21 पास बुक, छह सिम, तीन मोबाइल और कार बरामद की है। रवि बीए पास है। गुमराह करने के लिए रवि ने एक कार ले रखी है जिसे वह टैक्सी में चलाता है। एसीपी ने बताया इन्होंने नंदग्राम के रहने वाले कई लोगों को योजना के नाम पर लाभ दिलाने का झांसा देकर दस्तावेज लेकर खाते खुलवाए थे। जिनमें 50 लाक रुपये से ज्यादा की ट्रांजेक्शन हुई। धोखाधड़ी का पता चलने पर करन व अन्य लोगों ने पुलिस से शिकायत कर नंदग्राम थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे दोनों और छत्तीसगढ़ के प्रतीक जॉन के साथ मिलकर लोगों को नौकरी दिलाने और योजना में लाभ दिलाने के नाम पर दस्तावेज लेकर बैंक खाते खुलवाते हैं और सिम एक्टिवेट कराते हैं। बैंक खातों की चेक बुक, पास बुक, डेबिट कार्ड प्रतीक जॉन को कुरियर कर देते हैं। एसीपी ने बताया कि प्रतीक अलग-अलग तरीकों से साइबर ठगी करता है। ठगी की रकम को इन्हीं खातों में मंगवाता है। प्रतीक एक खाते खुलवाने के उन्हें 10 हजार रुपये देता है। इनमें से वह 2500-2500 रुपये दोनों खुद रखते हैं और बाकी रकम लोगों को खाते खुलवाने के लिए लालच के तौर पर देते हैं। कई साल से वह ऐसा कर रहे थे।

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