दिल्ली सरकार के स्कूल के प्रिंसिपल पर भ्रष्टाचार के आरोप, पीड़ितों ने की जांच की मांग

Delhi government school principal accused of corruption, victims demand investigation

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के प्रशांत विहार स्थित राजकीय उच्चतर बाल विद्यालय के प्रिसिंपल मनदीप डबास और उनके सहयोगी राहुल डबास पर कई गंभीर आरोप लगाने का मामला सामने आया है। हालांकि जब इस संबंध में उनका पक्ष जाना गया तो उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया और इन सभी आरोपों को गलत बताया। अब उन पर लगाए गए आरोप सही हैं या गलत यह बात जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
मनदीप डबास के खिलाफ प्रशांत विहार थाने में एफआईआर संख्या 319/2019 और 391/2024 दर्ज की गई है, जिसमें उन पर शराब पीने और मारपीट करने के आरोप हैं। इसके अतिरिक्त, राहुल डबास पर बिना अनुमति के विदेश यात्रा करने और सरकारी धन का दुरुपयोग करने के आरोप लगाया गया है।
इस मामले में शिकायतकर्ता शिक्षकों ने कहा है कि मनदीप डबास ने एक दिव्यांग अनुसूचित जाति के शिक्षक का मनमाने तरीके से स्थानांतरण के लिए आवेदन करवाया और एक अन्य एससी शिक्षक को बंद कमरे में पीटा। इसके अलावा, बाहरी परीक्षाओं में भी जमकर भ्रष्टाचार की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि विभाग में इन गंभीर मुद्दों की शिकायत करने पर उन्हें मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। एक शिकायतकर्ता के तो महज 15 दिन के भीतर तीन बार स्थानांतरण कर उन्हें शिकायत वापस लेने का दबाव डाला गया।
जांच के लिए 5 अगस्त 2024 को एक समिति गठित की गई थी, लेकिन 20 अगस्त तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 21 अगस्त को, जब शिकायतकर्ताओं ने शिक्षा निदेशक और विशेष सचिव (सतर्कता) से गुहार लगाई, तब जांच पर पहुंची, लेकिन उनकी रिपोर्ट भी अभी सामने नहीं आई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मनदीप डबास के खिलाफ कई शिकायतें लंबित हैं और उनके भाई संदीप डबास, जो शिक्षा विभाग में DASS ग्रेड II अधिकारी हैं, उनके प्रभावी संबंधों का लाभ उठाकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
आरोपों में यह भी शामिल है कि राहुल डबास ने बायोमेट्रिक जांच में यह साबित किया कि वह स्कूल में आए बिना ही पूरा वेतन ले रहे हैं। इसके अलावा मनदीप डबास को एक मामले में पहले ही निलंबित किया जा चुका है, लेकिन फिर भी उन्हें प्रिंसिपल के पद पर नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति नियमों का उल्लंघन है, क्योंकि उन्होंने जानबूझकर अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई। वहीं, दूसरी ओर प्रिंसिपल मनदीप डबास ने बातचीत के दौरान बताया कि उन पर लगे आरोप निराधार हैं। अब पीड़ित और आरोपी दोनों को जांच की रिपोर्ट का इंतजार है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

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