गाजियाबाद में गर्भवती महिलाएं अब प्राइवेट केंद्रों पर भी फ्री में करा सकेंगी अल्ट्रासाउंड

गाजियाबाद। सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को अब निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भी फ्री में जांच की सुविधा मिलेगी। इसके लिए शासन स्तर से जिले में 36 निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से 29 केंद्रों को स्वीकृति दी जा चुकी है। 7 केंद्रों की शासन से स्वीकृति मिलने का इंतजार है। यह व्यवस्था शुरू होने से सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने या दूसरे बहानों से गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
जिले में सरकारी अस्पतालों में महिला अस्पताल, कंबाइंड अस्पताल संजयनगर और लोनी समेत सभी सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध है। इसके बावजूद गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ता है। जल्दी जांच करवाने के लिए महिलाओं को निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। इसके एवज में उन्हें शुल्क देना पड़ता है। अब प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं के लिए शासन स्तर से ई-रुपी वाउचर की व्यवस्था की गई है। जिले में इस व्यवस्था के तहत 29 निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को योजना में शामिल किया गया है। इन सेंटरों पर गर्भवती महिलाएं ई-रूपी वाउचर के जरिए अल्ट्रासाउंड जांच करवा सकेंगी।
ई-रुपी वाउचर से सरकार करेगी भुगतान
पीसीएनडीटी के नोडल प्रभारी डॉ. चरण सिंह ने बताया कि ई-रुपी वाउचर के जरिए एनएबीएल से मान्यता प्राप्त डायग्नोस्टिक सेंटर को अल्ट्रासाउंड करने के लिए 300 रुपये और अन्य केंद्रों को 255 रुपए का भुगतान किया जाएगा। जहां सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा बंद है, वहां महिलाओं को वाउचर दिया जाएगा, जिससे वे निजी लैब पर जाकर फ्री अल्ट्रासाउंड जांच करवा सकें। अगर महिला अस्पताल में भी किसी कारण से गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाएंगे तो उन्हें भी ई-रुपी वाउचर दिया जाएगा। इसके साथ ही सभी सीएचसी और महिला अस्पताल में योजना में शामिल सभी निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की सूची पते सहित अंकित की जाएगी। इससे गर्भवती महिलाओं को अपने क्षेत्र के अल्ट्रासाउंड सेंटर को तलाशने में परेशानी न हो।
अल्ट्रासाउंड के लिए लंबी वेटिंग रहती है
जिले के सरकारी अस्पतालों में रोजाना 500 से ज्यादा मरीजों को अल्ट्रसाउंड जांच लिखी जाती है। मरीजों की लंबी लाइन के कारण अल्ट्रासाउंड के लिए एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ता है। जिला एमएमजी अस्पताल में रोजाना 50 से 60 मरीजों को जांच लिखी जाती है, लेकिन दिनभर में 25 से 30 मरीजों की ही जांच हो पाती है। महिला अस्पताल में भी रोजाना 70 से 80 गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड जांच लिखी जाती है, लेकिन रोजाना जांच की संख्या 25 से 30 है। जिसके चलते इन अस्पतालों में एक सप्ताह तक की वेटिंग बनी रहती है। इसके अलावा सभी सीएचसी और ब्लॉक लेवल पीएचसी पर भी रोजाना 200 से 250 अल्ट्रासाउंड जांच लिखी जाती हैं।
सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जांच की मशीन खराब रहने के कारण अक्सर गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर किसी डायग्नोस्टिक केंद्र के लिए रेफर कर देते थे। इस दौरान कई बार आरोप लगाते थे कि डॉक्टर अपने मन से डायग्नोस्टिक सेंटर तय कर मरीज को भेजते हैं, जिसमें उनकी मिलीभगत भी हो सकती है। इस प्रकार के आरोप न लगें, इसके लिए शासन के निर्देश पर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग में 29 अल्ट्रासाउंड सेंटर निर्धारित कर दिए गए हैं। जहां अस्पताल से रेफर की गई महिलाओं की फ्री में अल्ट्रासाउंड जांच हो सकेगी। बाद में उस सेंटर को पेमेंट स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button