फरीदाबाद में कचरा घर बन गई 300 करोड़ की जमीन, अफसरों की लापरवाही से कबाड़ियों का कब्जा

फरीदाबाद। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से शहर में काफी जमीन पर कब्जा है। शायद ही ऐसा कोई सेक्टर बचा होगा, जहां कब्जा न हो। कहीं झुग्गी हैं तो कहीं कबाड़ियों ने कब्जा किया हुआ है। अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से कब्जाधारकों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसा ही हाल सेक्टर-58 का है। यहां अर्थमूवर बनाने वाले उद्योग के पीछे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की करीब 16 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। वर्तमान में इस जमीन की कीमत 300 करोड़ से अधिक है। वैसे तो इसे कामर्शियल इस्तेमाल के लिए आरक्षित किया गया था लेकिन डेढ़ दशक से खाली पड़ी है।
अब यह कचरा घर बन गई है। तेजाब, केमिकल व सीवर के टैंकर खाली होते हैं। लोगों ने जगह-जगह अतिक्रमण कर लिया है। काफी झुग्गी डाल दी गई हैं। मुख्यमंत्री व अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायत दी गई लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस वजह से यहां उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमी बेहद परेशान हैं।
सेक्टर-58 तीन भाग में बंटा हुआ है। एक में ट्रांसपोर्ट नगर और दूसरे में इलेक्ट्रोप्लेटिंग जोन है। बाकी हिस्से में उद्योग स्थापित हैं। जगह-जगह एचएसवीपी की काफी खाली जमीन पड़ी है। इसी जमीन पर कबाड़ी प्रतिबंधित स्क्रैप का खेल कर रहे हैं। यहां प्लास्टिक से लेकर रबड़ का स्क्रैप काफी पड़ा हुआ है। जो दिन ढलते ही जलना शुरू हो जाता है। खाली प्लाटों में स्क्रैप की राख देखी जा सकती है। जो दिनभर हवा चलते ही उड़ती रहती है। इससे वायु प्रदूषण का स्तर भी बहुत अधिक बढ़ता है। इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी कार्रवाई नहीं करते।
एचएसवीपी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हैं। जबकि मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल उपाध्यक्ष हैं व कई वरिष्ठ आइएएस अधिकारी भी सदस्य हैं। इसके बावजूद सरकारी जमीन पर कब्जा करने व कचरा फैलाने वालों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है।
सेक्टर-20ए, 20बी, सेक्टर-55 सहित शायद ही ऐसा कोई सेक्टर होगा, जहां सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं है। सेक्टर-20ए और 20बी में कई बार तोड़फोड़ भी की है लेकिन कब्जाधारक बाज नहीं आ रहे हैं। यहां कुछ दबंग लोगों ने कबाड़ियों के गोदाम बनवा दिए हैं, उनसे वसूली की जाती है। इतना ही नहीं सेक्टर-20बी में अवैध रूप से पार्किंग भी चल रही है। इसमें कहीं न कहीं अधिकारियों की मिलीभगत होती है।
यही कारण है कि ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। ग्रेटर फरीदाबाद में भी कब्जों की भरमार है। यहां जिन किसानों ने मुआवजा उठा लिया है, उन्होंने भी जमीन से कब्जा नहीं छोड़ा है। मास्टर रोड किनारे अवैध रूप से नर्सरी चल रही हैं, दुकानें बन गई हैं, फुटपाथ पर कब्जा हो गया है। कहीं बाजार सज रहा है तो कहीं सब्जी मार्केट लग रही है तो कहीं कच्ची और पक्की दुकानें बनाकर जमकर किराया वसूला जा रहा है।

सबसे बड़ी समस्या सेक्टरों में कब्जों की है। इनकी वजह से उद्यमियों को दी जाने वाली मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। तेजाब व केमिकल को टैंकर जगह-जगह डाल देते हैं, इससे भूजल जहरीला हो रहा है। कई बार शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

– एससी गर्ग, प्रधान, सेक्टर-58 इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन

करोड़ों रुपये खर्च कर प्राधिकरण की जमीन पर उद्योग लगाने वाले उद्यमी परेशान हैं और कब्जे करने वाले मौज मार रहे हैं। सरकार को राजस्व देने के मामले में भी आगे हैं, लेकिन इनकी समस्याओं की ओर विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

– एचएल भुटानी, उद्यमी

कब्जों को हटाने के लिए एचएसवीपी की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बेशकीमती जमीन पर धड़ल्ले से गलत धंधे हो रहे हैं। उनके सेक्टर में खाली पड़ी जमीन पर प्रतिबंधित कचरा भी डाला जाता है। इससे पर्यावरण को क्षति पहुंचती है। कब्जाधारकों से कुछ बोल नहीं सकते, लड़ने पर उतारु हो जाते हैं। अधिकारी सुनवाई नहीं करते। जल्द मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत की जाएगी।

– जेएल गर्ग, महासचिव, इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन

मेरी जानकारी में यह समस्या आई नहीं है। मुझे इस बारे में कोई शिकायत भी प्राप्त नहीं हुई है। टीम भेजकर मौका मुआयना कराया जाएगा। कब्जों का सफाया होगा और इस जगह को साफ भी कराया जाएगा।

– नवीन कुमार, संपदा अधिकारी, एचएसवीपी
Industrial sectors turn into untreated waste dumping ground in Faridabad -  The Tribune

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