दिवालिया होने से बची अमेरिकी सरकार, अमेरिकी ऋण सीमा विधेयक सीनेट में भी पास

दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश अमेरिका के ऊपर से दिवालिया होने का खतरा टल गया है। देनदारियों में चूक से बचाने के लिए कर्ज सीमा बढ़ाने से जुड़ा विधेयक अब अमेरिकी संसद के उच्च सदन सेनेट से भी पास हो गया है। एक दिन पहले निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्ज ने इस पर मुहर लगाई थी। विधेयक को अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के पास दस्तखत के लिए भेजा गया है। यह औपचारिकता भर है।
अमेरिका में 1917 में कानून बना था, जिसके तहत वहां सरकार सीमा से ज्यादा कर्ज नहीं ले सकती। यह सीमा अभी 31.4 ट्रिलियन डॉलर है। अमेरिका इस सीमा को पार कर चुका है। ऐसे में कर्ज सीमा बढ़ाए बिना सरकार आगे के खर्च के लिए कर्ज नहीं ले सकती थी। अमेरिकी संसद से पास विधेयक इस कर्ज सीमा को 1 जनवरी 2025 तक सस्पेंड कर देगा। इससे सरकार अपनी देनदारियों को चुकाने के लिए रकम उधार ले सकेगी। साल 1960 से 79 बार सीमा को बढ़ाया गया है।
सरकार अपने खर्च को चलाने के लिए कर्ज लेती है। ये रकम अमेरिकी कांग्रेस यानी संसद तय करती है। दुनिया के कई देशों का बजट घाटे में चलता है। यानी टैक्स से जितनी आमदनी होती है उससे ज्यादा खर्चे होते हैं। इस बिल को पेमेंट करने के लिए सरकार कर्ज लेती है। अमेरिका में ये एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, इकोनॉमी के लिहाज से कर्ज की सीमा तय होती है।

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