आगरा में दबंगों ने युवक को जिंदा दफनाया, कुत्तों के नोचने पर युवक को आया होश
In Agra, the bullies buried the young man alive, the young man regained consciousness after being bitten by dogs

आगरा/उत्तर प्रदेश। दबंगों ने मामूली विवाद में युवक को घर से बुलाया। मारपीट के बाद रस्सी से गला घोंट दिया। आरोपियों ने उसे मरा समझ कर गड्ढे में दफना दिया। इसके बाद मौके से फरार हो गए। आधी रात को कुत्तों ने जमीन खोदकर युवक को नोंच कर खाने का प्रयास किया, तभी उसे होश आ गया और वहां से किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकला। घरवालों ने युवक को अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस कमिश्नर के आदेश पर 13 दिन बाद इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है।मामला थाना सिकंदरा के अरतौनी गांव का है। यहां 18 जुलाई को दो पक्षों में विवाद हुआ था। 24 वर्षीय रूप किशोर ने गाली देने पर एक युवक का विरोध किया था। इसी बात पर आरोपी रंजिश मान बैठे थे। 18 जुलाई की रात को ही अंकित, गौरव, करण और आकाश घर आए और रूप किशोर को अपने साथ ले गए। चारों ने गांव के बाहर खेतों की ओर ले जाकर रूप किशोर को बुरी तरह पीटा। उसकी टीशर्ट से गले में फंदा बनाकर उसे घसीटते हुए ले गए। मारपीट करने के बाद उसे मरा हुआ समझकर यमुना किनारे रेत में गड्डा खोद कर दफना दिया।
जंगली कुत्तों ने मांस नोचना शुरू किया
रूप किशोर का खून सूंघकर कुछ जंगली कुत्ते गड्ढे पर पहुंचे। बेहोश युवका का मांस नोच कर खाने लगे। मांस नोचने पर दर्द हुआ तो रूप किशोर होश में आया। किसी तरह गड्ढे से निकल कर पास की ही बस्ती में पहुंचा। वहां लोगों को पूरी घटना की जानकारी दी अपने परिजनों का नंबर दिया। सूचना पर घरवाले पहुंचे। रूप किशोर ने बताया कि 7 लोगों ने मिलकर उसे मारा है। घरवालों ने उपचार के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया जहां अभी भी उसका इलाज चल रहा है।
रूप किशोर के भाई दीपक का कहना है कि वे लोग रूपकिशोर को लेकर 19 जुलाई को थाना सिकंदरा पहुंचे थे। पुलिस ने तहरीर लेकर मेडिकल करवाया पर कार्रवाई नहीं की। कई दिन तक चक्कर काटते रहे। उसके बाद पुलिस कमिश्नर जे. रविन्दर गौड से शिकायत की। उनके आदेश पर पुलिस ने पीड़ित परिवार को बुलाकर दोबारा तहरीर लेकर बुधवार को मुकदमा दर्ज किया है। गुरुवार को थाना सिकंदरा के इंस्पेक्टर क्राइम शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि जांच में पाया गया है कि पीड़ित युवक के साथ मारपीट की घटना आरोपियों ने की है, लेकिन उसे जिंदा दफन करने अथवा गला घोंटने की बात प्रथम दृष्टया जांच में सही नहीं पाई गई है। तहरीर में भी दफन करने वाली बात नहीं लिखी है बल्कि यह लिखा है कि उसे जिंदा गाड़ने के लिए ले जा रहे थे।




