गाजियाबाद में मैजिक पेन से खाता खाली करने वाले दो ठग गिरफ्तार, जेल जाकर भी नहीं सुधरे
Two fraudsters arrested in Ghaziabad for emptying accounts using magic pen, did not improve even after going to jail

गाजियाबाद ब्यूरो। वाहनों का बीमा और पार्ट्स की समय अवधि बढ़ाने के नाम पर लाखों की ठगी करने दो आरोपितों को स्वाट और इंदिरापुरम पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपित एनसीआर में लोगों को झांसा देकर चेक में अपने मैजिक पैन से रकम भरवाते थे, बाद में रकम मिटाकर ज्यादा भर खाता खाली कर देते थे।
एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि ठगी का मास्टरमाइंड दिल्ली के मजलिस पार्क निवासी बलवीर सिंह उर्फ अंकित है। इसके साथ उत्तरी दिल्ली के गोकुलपुरी के रहने वाले अरीब हसन को गिरफ्तार किया गया है। बलवीर के खिलाफ दिल्ली, कौशांबी, इंदिरापुरम और फरीदाबाद के थानों में छह से ज्यादा मामले दर्ज हैं।
एसीपी अभिषेक ने कहा कि बलवीर सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय और अरीब निजी काॅलेज से स्नातक उत्तीर्ण है। बलवीर सिंह ने साल 2019 से लोगों को ठगना शुरू किया। वर्ष 2023 में उसके गिरोह में दो सदस्य और भी थे लेकिन जब वह धोखाधड़ी के मामले में जेल गए तब उन्होंने गिरोह को छोड़ दिया।
इसके बाद बलवीर ने अरीब को शामिल किया। वसुंधरा सेक्टर 14 निवासी अशोक कुमार अग्रवाल ने पांच फरवरी 2025 को मुकदमा दर्ज करवाया था। उनका आरोप था कि उनके वाहन की बीमा पालिसी कराने के नाम पर एक व्यक्ति ने उनसे चेक लिया। जिस पर रकम आरोपी के दिए पेन से भरी थी।
एसीपी ने बताया कि चेक के माध्यम से आरोपियों ने बैंक जाकर 3.10 लाख रुपये निकाल लिए थे। कविनगर निवासी महिला के खाते से इसी तरह एक लाख रुपये निकाले गए थे। छानबीन के दौरान पुलिस बलवीर तक पहुंची। आरोपितों के खिलाफ फरीदाबाद में तीन और दिल्ली के मंगोलपुरी थाने में एक मुकदमा दर्ज है। बलवीर वर्ष 2019 और 2023 में जेल भी जा चुका है।
बलवीर ने दिल्ली के लक्ष्मीनगर में बिना नाम का कार्यालय भी खोल रखा था। पूछताछ में बलवीर ने बताया कि वह ऐसे लोगों का आनलाइन डाटा खरीदता था, जिनके वाहनों का बीमा या किसी पार्ट्स की वारंटी खत्म हो गई हो। इसके बाद उन्हें फोन करके वारंटी या समयावधि बढ़वाने का झांसा देकर मैजिक पेन से भरा हुआ चेक लेते थे, फिर चेक में से भरी रकम मिटाकर ज्यादा भरकर खाते से निकालते थे। मैजिक पैन में एक खास तरह की स्याही होती है, जो लिखावट के कुछ समय बाद गायब हो जाती है। कुछ पैन में स्याही से लिखे शब्द नहीं दिखते हैं, इन्हें रोशनी के माध्यम से ही देखा जा सकता है। बच्चों के लिए भी स्याही के रंग बदलने वाले पैन बाजार में मिलते हैं।




