नेपाल का नक्‍शा बदल भारत से नहीं मिलेगी जमीन, दहल का चीन समर्थक ओली पर ‘प्रचंड’ अटैक

काठमांडू,(एजेंसी)। नेपाल में 20 नवंबर को होने जा रहे आम चुनाव के प्रचार में भारत के साथ सीमा विवाद का मुद्दा फिर से गरमा गया है। चीन के इशारे पर नाचने वाले केपी शर्मा ओली के भारत विरोधी बयान के बाद अब सत्‍तारूढ़ गठबंधन के नेता पुष्‍प कमल दहल ने जोरदार पलटवार किया है। प्रचंड ने उत्‍तराखंड से सटे नेपाल के धारचूला में कहा कि केवल नेपाल का नक्‍शा बदलने मात्र से हमें यह आधार नहीं मिल जाता है कि हम अपनी खोई हुई जमीन को भारत से फिर से हासिल कर लेंगे। इससे पहली ओली ने दावा किया था कि अगर वह सत्‍ता में आते हैं तो भारत से जमीन वापस लेंगे। प्रचंड ने कहा कि कथित नेपाली जमीन को हासिल करने के लिए भारत के साथ राजनयिक प्रयास करने होंगे। नेपाली नेता प्रचंड ने कहा कि पिछले चुनाव में उन्‍होंने ओली का समर्थन किया था लेकिन इस बार उनके फिर से चुने जाने की संभावना नहीं है। इससे पहले केपी ओली ने नेपाल के मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए धारचूला के पास भारत विरोधी बयान दिया था। ओली ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए कहा था कि हम अपनी जमीन को भारत से वापस लेंगे। इसमें कालापानी, लिपुलेख और लिंपाधुरिया शामिल है।
नेपाल के कालापानी, लिपुलेख और लिंपाधुरिया के दावे को भारत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ओली ने यह भी कहा था कि वह नेपाल की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्‍होंने कहा, ‘हम अपनी एक इंच जमीन को भी नहीं छोड़ेंगे।’ वहीं ओली के दावे पर नेपाल के प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा ने कहा है कि नेपाल की कब्‍जा की गई जमीन को हम राजनयिक प्रयासों और आपसी संबंधों के आधार पर वापस लेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई ने भी ओली पर तीखा हमला बोला और बिना नाम लिए कहा कि किसी को भी देश की क्षेत्रीय एकजुटता को चुनावी अजेंडा नहीं बनाना चाहिए।

भट्टाराई ने कहा कि फासीवाद से प्रभावित लोग ही राष्‍ट्रवाद को चुनावी अजेंडा बना सकते हैं। उन्‍होंने राष्‍ट्रीय एकजुटता को चुनावी अजेंडा नहीं बनाने की ओली को सलाह दी। इससे पहले प्रधानमंत्री रहने के दौरान ओली ने नेपाल का नक्‍शा बदल दिया था और तीनों ही विवादित इलाकों को नेपाल का हिस्‍सा बताया था। यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब साल 2020 में भारत ने लिपुलेख को धारचूला से जोड़ने वाली रोड को खोल दिया। नेपाल ने इसका विरोध किया था। भारत ने इसका करारा जवाब दिया था।

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