मंगलसूत्र, अंगूठी और दांत में बंधे तारों से शवों की पहचान, दहला रहीं डोंबिवली हादसे में जलकर राख हुईं लाशें

कल्याण/महाराष्ट्र। डोंबिवली स्थित अमुदान केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में गुरुवार को हुए विस्फोट के बाद आग लगने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। मलबे से तीन और शव निकाले गए हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इस बीच, हादसे के दूसरे दिन भी कंपनी परिसर में किसी का हाथ, तो किसी का कटा पैर मिला। किसी शव का लिवर बाहर निकल आया तो किसी शव के पास मिले मंगलसूत्र और चूड़ियों से पहचान की गई। अब भी 11 लोगों का पता नहीं चल पाया है। अमुदान केमिकल्स में काम करने वाली अपनी पत्नी को पागलों की तरह ढूंढ रहे अमित खानविलकर को गुरुवार को शास्त्री नगर अस्पताल से फोन आया और उन्हें अस्पताल पहुंचने को कहा गया। रामचंद्र नगर में रहनेवाले अमित जब अस्पताल पहुंचे तो वहां दो महिलाओं के शव देखकर उनके हाथ-पांव फूल गए। ये दोनों शव इतनी बुरी तरह से झुलसे हुए थे, जिन्हें पहचान पाना काफी मुश्किल था। अमित ने कहा कि इस विस्फोट ने उनकी दुनिया उजाड़ दी है। उन्होंने अपनी पत्नी रिद्धि (38) के मंगलसूत्र और अंगूठी से शव की पहचान की। उनके एक 12 साल का बेटा है।
रिद्धि के साथ काम करने वाली रोहिणी कदम (23) के परिवार ने भी अस्पताल में उसके शव की पहचान की। रोहिणी मानपाडा के आजदे गांव में अपने परिजन के साथ रहती थी। परिवार के गमगीन सदस्यों ने कहा कि रोहिणी और रिद्धि ने बिना किसी गलती के अपनी जान गंवा दी। रोहिणी के भाई ने अपनी बहन के दांत में लगे तार से शव की पहचान की। रोहिणी कदम भी अमुदान केमिकल कंपनी के अकाउंट विभाग में काम करती थी। उसके बड़े भाई ने बताया कि घटना के वक्त वह मुंबई में था। जब उसे दोस्तों से ब्लास्ट की खबर मिली, तब वह शास्त्री नगर हॉस्पिटल पहुंचा। वहां दो शव रखे हुए थे। दांत में लगे तार से उसकी पहचान हुई। रोहिणी की शादी के लिए उसके परिवार लड़का ढूंढ़ रहा था, लेकिन हादसे में उसकी बहन की जान चली गई।
बता दें कि डोंबिवली एमआईडीसी में अमुदान केमिकल कंपनी में हुए ब्लास्ट में 11 कर्मचारियों के बारे में कोई पता नहीं चल सका है। पुलिस ने मलबे से 8 बॉडी मिली है। पुलिस का कहना है कि 8 शवों की स्थिति एकदम खराब है। उसमें से सिर्फ दो महिला शवों की पहचान हो सकी है। परिजन मंगलसूत्र और चूड़ियों को पहचान कर शव ले गए हैं, जबकि 6 शव आग में इतनी बुरी तरह से झुलस गए हैं कि उनकी पहचान कर पाना मुश्किल है। शवों की पहचान के लिए अब पुलिस डीएनए टेस्ट कराएगी।
घटना के बाद से गायब लोगों के परिजन अब भी सदमे में हैं क्योंकि उनके शव या फिर उनकी तबियत के बारे में उन्हें कुछ पता नहीं चल सका है। परिवार के लोग कभी हादसे की जगह जाकर अपने रिश्तेदारों के शव को ढूंढ़ते हुए दिखाई देते हैं, तो कभी हॉस्पिटल में आकर अपने लोगों की इंक्वॉयरी करते हैं। इसमें सत्यनारायण का परिवार भी है, जो हादसे के दूसरे दिन भी हॉस्पिटल और घटनास्थल पर शव का पता लगाने आया था।
कई लापता लोगों के शव नहीं मिले
गायब लोगों में ज्यादातर लोग कामगार या हेल्पर का काम करते थे, जबकि दो महिला रिद्धि खानविलकर और रोहिणी कदम, का शव उनके परिवार वालों ने दावा कर के ले लिया है। वह दोनों महिलाएं अमुदान केमिकल इंजीनियरिंग के अकाउंट सेक्शन में काम करती थीं। इन दोनों के अलावा इसी कंपनी में काम करनेवाले सिराबुद्दीन अहमद (24), सत्यनारायण राजभर (40), धवल धवानी (38), भरत जैसवाल (40) और गणेश दास (22) का भी पता नहीं चल सका है। गायब लोगों में से विशाल पौडवाल (40) कॉसमॉस कंपनी में काम करते थे, जबकि राकेश राजपूत सत्यवर्णा कंपनी में काम करते थे। रवि कुमार (40) और रवि राजभर (30) यह यहां की किस कंपनी में काम करते थे, वह पता नहीं चल सका है।
काउंसलिंग के लिए एक टीम तैनात
कल्याण डोंबिवली महानगर पालिका में हेल्थ डिपार्टमेंट के उपायुक्त प्रसाद बोरकर ने बताया कि हादसे में शव इतनी बुरी तरह से झुलस गए हैं कि उनको देखकर पहचान पाना नामुमकिन है। इन शवों की शिनाख्त करने के लिए डीएनए टेस्ट किया जाएगा। कई लोगों के शव मिलने के बावजूद उनके परिवार वालों की परेशानी देखते हुए पुलिस और हेल्थ विभाग ने काउंसलिंग के लिए एक टीम तैनात की है।
काउंसलर मीनाक्षी का कहना है कि क्षत-विक्षत शवों की शिनाख्त कर पाना मुश्किल है। ऐसे में हम मृतक के परेशान घरवालों को समझाएंगे। अगर गड़बड़ी में किसी और का शव ले जाएंगे, तो जिंदगी भर के लिए एक सदमा रह जाएगा। उन्हें थोड़ा धीरज रखकर डीएनए टेस्ट के रिजल्ट आने तक इंतजार करने को कहा गया है। ब्लास्ट में घायल लोगों में से 40 लोगों को डिस्चार्ज कर दिया गया है, 28 लोग ऐडमिट हैं, जबकि 14 लोग आईसीयू में भर्ती हैं।

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