राजस्थान के कोटा में आयुर्वेदिक विभाग की परीक्षा में हुई चीटिंग, सेंटर सील

परीक्षा देने आए लड़कों ने पकड़ी थी चीटिंग, फिर हंगामा भी हुआ था

कोटा/राजस्थान। कोचिंग सिटी कोटा में आयुर्वेदिक विभाग के एग्जाम में चीटिंग करवाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार युवकों को गिरफ्तार किया है। साथ ही एग्जाम सेंटर को सील कर दिया है। एग्जाम कराने वाली एजेंसी के लोगों के भी शामिल होने का अनुमान है। कोटा के आरकेपुरम थाना पुलिस ने ऑनलाइन परीक्षा में नकल संबंधी केस में बीएसएनएल सर्किल के पास कोटा ऑनलाइन आईटी एजुकेशन सेंटर को – सील कर दिया। उपकरण, प्रिंटेड नकल सामग्री और सीसीटीवी फुटेज जब्त – किए हैं। जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया, उनसे पूछताछ की जा रही है।
27 नवंबर को सेंटर काउंसलिंग ऑफ रिसर्च आयुर्वेदिक साइंस में मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) की ऑनलाइन परीक्षा हुई थी। परीक्षार्थी रविप्रताप सिंह ने शिकायत दी थी कि सीट नंबर 45 पर बैठे अभ्यर्थी को पर्यवेक्षक बार-बार उत्तरों की प्रिंटेड कॉपी दे रहा है। विरोध करने पर पर्यवेक्षकों ने शिकायतकर्ता और एक अन्य अभ्यर्थी मदनसिंह से धक्का-मुक्की की। नकल सामग्री नष्ट करने की भी कोशिश की। परीक्षा देने आए लड़कों ने जब चीटिंग पकड़ी तो सेंटर पर भारी हंगामा हुआ। पुलिस पहुंची।
इसके बाद शिकायतकर्ता अभ्यर्थी ने नकल सामग्री के कुछ अवशेष बचाकर पुलिस को सौंप दिए थे। शिकायत पर एसपी तेजस्विनी गौतम व अधिकारियों ने एमओबी व एसएफएल टीमों के साथ मौका निरीक्षण किया। सीसीटीवी और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने नकल कराने के चार आरोपियों नितिन पहाड़िया, सुरजसिंह धनगर, विनयकुमार और सागर करूवान को गिरफ्तार कर लिया। इन्हें कोर्ट ने 6 दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर सौंपा है। पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।
जांच टीम ने केंद्र से जब्त कंप्यूटर और प्रिंटेड हल कॉपी का मूल प्रश्नपत्र से मिलान किया, तो बड़ी संख्या में उत्तर हूबहू समान पाए गए। पुलिस की जांच में सामने आया है कि ये लोग परीक्षा के पहले दिन से ही नकल करवा रहे थे। 27 नवंबर को भी इन्होंने कई लोगों को सीधे चिटिंग करवाई। पुलिस को कई सारे चिट मौके पर मिले थे।
कोटा सिटी एएसपी दिलीप सैनी ने कहा कि पेपर करवाने वाली एजेंसी के भी कई लोग गिरोह में शामिल हैं। अभी चार आरोपी पकड़े गए हैं। इनसे भी पूछताछ की जा रही है अन्य आरोपी के पकड़ में आने के बाद कई चीजें स्पष्ट होंगी। इन्होंने एक स्टूडेंट्स से कितने पैसे लिए, विभाग के तो अधिकारी कर्मचारी शामिल नहीं थे। पहले किन परीक्षाओं में गड़बड़ी की है। पुलिस इन सब का पता लगाने के लिए इन्वेस्टिगेशन आगे बढ़ा रही है।

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