दिल्ली के ऐतिहासिक टाउनहाल का प्रवेश द्वार ढहा, 145 साल तक यहीं से चलता था नगर निगम का कामकाज
चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल की छत भारी बारिश के कारण ढह गई, जिससे प्रवेश द्वार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। दिल्ली के शासन की धुरी रही यह ग्रेड-1 विरासत इमारत विभिन्न योजनाओं के बावजूद उपेक्षा का शिकार रही है।

नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक टाउनहाल की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। पुरानी दिल्ली स्थित इस विरासत भवन के प्रवेश द्वार की छत तेज बारिश के कारण ढह गई। हादसे में प्रवेश द्वार का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है और अब इसकी मरम्मत के बजाय पुनर्निर्माण की जरूरत बताई जा रही है। राहत की बात यह रही कि घटना शनिवार रात हुई, जब परिसर में आम लोगों की आवाजाही नहीं थी। हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने एहतियातन पूरे प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है।
टाउनहाल परिसर में निगम चुनावों में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का भंडारण भी किया जाता है। उनकी सुरक्षा के लिए नागालैंड पुलिस के जवान यहां तैनात रहते हैं। छत और बीम गिरने के बाद निगम ने प्रवेश द्वार के आसपास लोगों की आवाजाही रोक दी है। क्षतिग्रस्त दीवारों के भी गिरने की आशंका को देखते हुए चेतावनी जारी की गई है और लोगों से उस हिस्से के पास नहीं जाने की अपील की गई है। मौके पर दमकल विभाग के अधिकारी भी मौजूद हैं।
निगम के एक अधिकारी के अनुसार, छत और बीम गिरने के बाद मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। कुछ मलबा और बीम हटाए जा चुके हैं, लेकिन पूरे प्रभावित हिस्से की सफाई में कई दिन लग सकते हैं। फिलहाल सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रवेश पोर्च के आसपास आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रखा गया है।
टाउनहाल दिल्ली की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों में शामिल है और इसे ग्रेड-1 संरक्षित विरासत भवन का दर्जा प्राप्त है। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी एमसीडी के पास है। कभी दिल्ली नगर निगम के प्रशासनिक कामकाज का प्रमुख केंद्र रहा यह भवन वर्ष 1866 से 2011-12 तक करीब 145 वर्षों तक निगम मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल होता रहा। बाद में सिविक सेंटर में निगम मुख्यालय स्थानांतरित होने के बाद से इमारत का नियमित उपयोग कम होता गया और इसके भविष्य को लेकर कई योजनाएं बनीं, लेकिन उनमें से अधिकांश अमल तक नहीं पहुंच सकीं।
टाउनहाल को कभी रेस्तरां तो कभी संग्रहालय के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया। वर्ष 2018 में तत्कालीन उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने यहां हेरिटेज होटल बनाने की योजना तैयार की थी, लेकिन निवेशकों की रुचि नहीं मिलने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया। वर्ष 2022 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने 33 वर्ष की लीज पर भवन लेकर यहां संग्रहालय, पुस्तकालय, शोध केंद्र और रेस्तरां विकसित करने में रुचि दिखाई थी। हालांकि, राजस्व साझा करने से जुड़े मुद्दे पर यह योजना भी अटक गई।
इसके बाद वर्ष 2024 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के साथ समझौता हुआ। इसके तहत निगम के पास मौजूद करीब 162 वर्षों के दुर्लभ दस्तावेजों और कलाकृतियों के संरक्षण के साथ परिसर के प्रेस भवन वाले हिस्से को निगम संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
वर्ष 2026 में टाउनहाल को लेकर एक बार फिर नई पहल हुई। अप्रैल में दिल्ली सरकार ने अपने बजट में इस ऐतिहासिक भवन को अपने अधीन लेकर पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की। इसके बाद सितंबर 2026 में दिल्ली सरकार और एमसीडी के बीच इसे ग्लोबल हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित करने के लिए समझौता हुआ। निगम अधिकारी के मुताबिक, अब दिल्ली सरकार का पर्यटन विभाग इस परियोजना को आगे बढ़ाएगा।
ऐतिहासिक महत्व रखने वाली इस इमारत के प्रवेश द्वार का ढहना उसके संरक्षण और रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रस्तावित ग्लोबल हेरिटेज सेंटर परियोजना के तहत भवन की सुरक्षा, मरम्मत और विरासत संरक्षण का काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।




