कौशाम्बी में अधिवक्ताओं ने एसडीएम और नायब तहसीलदार की अदालतों के बहिष्कार का लिया निर्णय
10 सूत्रीय मांगों को लेकर खोला मोर्चा, समस्याओं के समाधान तक न्यायिक कार्यों से रहेंगे विरत।

सचिन पांडेय/जिला ब्यूरो चीफ
कौशाम्बी,उत्तर प्रदेश। मंझनपुर तहसील में प्रशासनिक और न्यायिक कार्यप्रणाली को लेकर अधिवक्ताओं का असंतोष खुलकर सामने आ गया है। अधिवक्ता वेलफेयर एसोसिएशन, तहसील मंझनपुर की आवश्यक बैठक में अधिवक्ताओं ने एसडीएम मंझनपुर और नायब तहसीलदार मंझनपुर/करारी की अदालतों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। एसोसिएशन ने 10 सूत्रीय समस्याएं उठाते हुए उनके समाधान की मांग की है।
बैठक में अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील की न्यायिक कार्यप्रणाली के कारण वादकारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि पुनर्स्थापन प्रार्थना पत्रों को दर्ज नहीं किया जा रहा है और जनता दर्शन में प्राप्त शिकायतों का भी संतोषजनक निस्तारण नहीं हो रहा है। इसके अलावा राजस्व से जुड़े धारा 76 और 80 के मामलों में कथित मनमानी, मुकदमों की पत्रावलियों के निस्तारण में देरी तथा बहस पूरी होने के बाद भी लंबे समय तक आदेश पारित नहीं किए जाने जैसे मुद्दे उठाए गए।
अधिवक्ताओं ने नायब तहसीलदार मंझनपुर/करारी अतुल वर्मा की कार्यप्रणाली और व्यवहार पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि न्यायिक मामलों का निस्तारण केवल तकनीकी आधार पर करने के बजाय उपलब्ध तथ्यों और मामले के गुण-दोष के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि वादकारियों को समय से न्याय मिल सके।
बैठक में समस्याओं पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक उठाई गई मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक अधिवक्ता एसडीएम मंझनपुर और नायब तहसीलदार मंझनपुर/करारी की अदालतों में न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे।
अधिवक्ताओं के इस फैसले से तहसील में राजस्व और न्यायिक कार्य प्रभावित होने की आशंका है। अब निगाहें तहसील प्रशासन के रुख पर टिकी हैं कि वह अधिवक्ताओं की 10 सूत्रीय मांगों पर क्या कदम उठाता है और दोनों पक्षों के बीच जारी गतिरोध का समाधान कब तक निकलता है।



