‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन 1 नवंबर को, रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य

रामलीला मैदान की रैली राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य, आगामी विधानसभा चुनाव और इंडिया गठबंधन में नेतृत्व की दावेदारी के बीच 1 नवंबर का शक्ति प्रदर्शन कांग्रेस की सियासी ताकत का इम्तिहान होगा।

नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस की रैली पार्टी और राहुल गांधी के लिए राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का अहम अवसर मानी जा रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के विरोध में आयोजित इस रैली के जरिए कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहती है। पार्टी ने रैली में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने का दावा किया है, हालांकि वास्तविक भागीदारी का पता आयोजन के बाद ही चलेगा।
कांग्रेस लंबे समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाती रही है। इससे पहले पार्टी चुनाव आयोग के कार्यालय और प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन कर चुकी है। अब बड़ी जनसभा के माध्यम से वह इस मुद्दे को आम लोगों तक पहुंचाने और व्यापक जनसमर्थन जुटाने की कोशिश में है। राहुल गांधी के लिए भी यह रैली अपने अभियान की स्वीकार्यता और जनभागीदारी परखने का अवसर होगी।
आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भी इस आयोजन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित कई राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में रैली में अच्छी भागीदारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के साथ चुनावी राज्यों में संगठन को सक्रिय करने का संदेश दे सकती है। हालांकि, पार्टी के सामने चुनौती भीड़ जुटाने के साथ इस राजनीतिक ऊर्जा को जमीनी संगठन और चुनावी अभियान में बदलने की है।
रैली का महत्व विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की एकजुटता से भी जुड़ा है। कांग्रेस इस आयोजन के जरिए गठबंधन में अपनी राजनीतिक भूमिका और नेतृत्व क्षमता का संदेश देना चाहती है। बड़ी भागीदारी पार्टी के अभियान को मजबूती दे सकती है, जबकि अपेक्षा से कम भीड़ जुटने पर उसके जनसमर्थन और रणनीति को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
रैली की तैयारियों को लेकर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली और आसपास के राज्यों के नेताओं तथा पदाधिकारियों के साथ बैठकें की हैं। पार्टी ने विभिन्न राज्यों के संगठन को अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है। हरियाणा से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की तैयारी बताई जा रही है।
इस बीच रैली को लेकर स्थानीय व्यापारियों ने त्योहारों के मौसम में यातायात बाधित होने और कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई है। उन्होंने आयोजन टालने की अपील की है। वहीं, राहुल गांधी ने कहा है कि ‘वोट चोरी’ का मुद्दा दुकानदारों, उनकी बचत और बच्चों के भविष्य से भी जुड़ा है। अब सबकी नजर 1 नवंबर को रामलीला मैदान में जुटने वाली भीड़ और कांग्रेस के संदेश पर है। रैली के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि पार्टी इस मुद्दे को व्यापक जनअभियान में बदलने में कितनी सफल रहती है।

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