जयपुर में 24 करोड़ रुपये के क्रिप्टो लेनदेन का खुलासा, हवाला और फर्जी बैंक खातों का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पकड़ा
जयपुर की वैशाली नगर थाना पुलिस ने फर्जी बैंक खातों, हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के सरगना विकास ढाका को गिरफ्तार किया है।

जयपुर,एजेंसी। राजस्थान की राजधानी जयपुर में साइबर ठगी, हवाला और क्रिप्टो करेंसी के जरिए अवैध धन का लेनदेन करने वाले कथित अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। वैशाली नगर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सरगना बताए जा रहे सीकर निवासी विकास ढाका को गिरफ्तार किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पिछले 2 वर्षों के दौरान आरोपी और उसके साथियों के माध्यम से करीब 24 करोड़ रुपये के यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी लेनदेन का खुलासा हुआ है। बताया गया है कि आरोपी करीब 20 दिन पहले ही जयपुर में अपना नेटवर्क फैलाने पहुंचा था।
पश्चिम जयपुर के पुलिस उपायुक्त प्रशांत किरण ने बताया कि 27 अक्टूबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि वैशाली नगर की नेमी सागर कॉलोनी स्थित चड्ढा अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 202 में साइबर ठगी और अवैध क्रिप्टो कारोबार से जुड़ा गिरोह संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने छापा मारकर सीकर निवासी विकास ढाका पुत्र राजेंद्र ढाका को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से 9 मोबाइल फोन, फिनो पेमेंट्स बैंक के 8 डेबिट कार्ड किट और गूगल पे के स्कैनर रोल बरामद किए गए।
प्रशिक्षु भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी अदिति उपाध्याय ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी जैसलमेर और सीकर के रिसॉर्ट तथा रेस्तरां में काम करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मजदूरों को पैसों का लालच देकर उनके पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल करता था। इन दस्तावेजों के आधार पर निजी बैंकों और भुगतान बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इसके अलावा एयरटेल पेमेंट्स बैंक के व्यापारी क्यूआर कोड भी तैयार करवाए जाते थे। बाद में इन बैंक खातों और क्यूआर कोड को कथित तौर पर ऑनलाइन जुआ मंचों तथा साइबर ठगी करने वालों को मोटे कमीशन पर उपलब्ध कराया जाता था।
वैशाली नगर के सहायक पुलिस आयुक्त अनिल शर्मा के अनुसार, इन खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा होने के बाद उसे तत्काल यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी में परिवर्तित कर दिया जाता था। इसके बाद दुबई से जुड़े हवाला नेटवर्क के माध्यम से धनराशि को भारतीय बाजार में वापस खपाने का कथित तौर पर प्रयास किया जाता था। पुलिस को आशंका है कि इस तरीके से अवैध धन के स्रोत को छिपाकर उसे वैध दिखाने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी की रकम को वैध धन के रूप में दिखाने के लिए कई तरीके अपनाए जाते थे। इनमें फोनपे के माध्यम से ऑनलाइन लेनदेन, नकद जमा मशीनों के जरिए रुपये निकालना और यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में रकम स्थानांतरित करना शामिल बताया गया है।
पुलिस अब आरोपी के मोबाइल फोन, बैंक खातों और बरामद दस्तावेजों की जांच कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। करीब 24 करोड़ रुपये के कथित क्रिप्टो लेनदेन की पूरी कड़ी, विदेशी संपर्कों और साइबर ठगी से जुड़ी रकम के वास्तविक स्रोत का पता लगाने के लिए जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस के अनुसार, मामले में अन्य गिरफ्तारियां और खुलासे भी हो सकते हैं।




