महिला सेल में पुलिस की संवेदनशील पहल, मासूम को दुलारती दरोगा अलका चौधरी का वीडियो वायरल
यूपी के बुलंदशहर में एक तस्वीर इस समय सोशल मीडिया में छाई हुई है। इस तस्वीर और वीडियो में महिला सेल प्रभारी अलका चौधरी एक बच्चे को प्यार-दुलार करती हुई दिखाई दे रही हैं।

बुलंदशहर,उत्तर प्रदेश। पुलिस की जिम्मेदारियों के बीच संवेदनशीलता की एक तस्वीर बुलंदशहर में सामने आई है। एसएसपी कार्यालय स्थित महिला सेल प्रभारी उपनिरीक्षक अलका चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वह महिला सेल के छोटे से कार्यालय में खटोले पर बैठे एक मासूम बच्चे को दुलारती और खिलाती नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद उनकी इस पहल की चर्चा हो रही है।
दरअसल, पति-पत्नी के विवाद और अन्य पारिवारिक मामलों में समझौते के लिए कई दंपती अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर महिला सेल पहुंचते हैं। पुलिस कार्यालय का माहौल बच्चों के लिए सहज बनाने के उद्देश्य से महिला सेल प्रभारी ने कार्यालय में बच्चों के लिए खटोले और खिलौनों की व्यवस्था की है।
महिला सेल में प्रतिदिन करीब चार से पांच परिवार पारिवारिक विवादों के समाधान और आपसी समझौते के लिए पहुंचते हैं। टीम दोनों पक्षों की बात सुनने के साथ परिवार के सदस्यों से बातचीत करती है और काउंसलिंग के माध्यम से विवाद सुलझाने का प्रयास करती है। कई मामलों में बातचीत के बाद पति-पत्नी के बीच समझौता हो जाता है और उन्हें साथ घर भेजा जाता है। समझौता नहीं होने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाती है।
महिला सेल प्रभारी अलका चौधरी के अनुसार, हर महीने करीब 30 पारिवारिक विवादों में समझौता कराने का प्रयास किया जाता है। उनके मुताबिक, कई मामलों में बातचीत और समझाइश के माध्यम से परिवारों को टूटने से बचाने में सफलता मिली है। हाल ही में 75 वर्षीय बुजुर्ग दंपती के बीच चल रहे विवाद को भी बातचीत के जरिए सुलझाया गया था।
वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा बच्चा भी एक पारिवारिक विवाद के मामले में अपनी मां के साथ महिला सेल पहुंचा था। उस समय उसके पिता साथ नहीं आए थे और बच्चा परेशान हो रहा था। बच्चे को परेशान देखकर अलका चौधरी ने उसे अपने पास बैठाया और दुलारने लगीं। कुछ देर बाद बच्चा शांत हो गया। महिला सेल प्रभारी के अनुसार, संबंधित परिवार को आपसी समझौते के लिए अगली तारीख दी गई है।
अलका चौधरी का कहना है कि महिला सेल का प्रयास रहता है कि पारिवारिक विवादों को बातचीत, काउंसलिंग और समझाइश के माध्यम से सुलझाया जाए। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में बच्चों की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि पारिवारिक विवादों का असर उन पर भी पड़ता है।




