बैगा जनजाति क्षेत्र में विधिक साक्षरता शिविर, ‘स्कूल चलें हम’ अभियान से बच्चों को शिक्षा के लिए किया प्रेरित

सुमिता शर्मा/जिला ब्यूरो चीफ
अनूपपुर/मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अनूपपुर के मार्गदर्शन में विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति क्षेत्र ग्राम उमर गोहान में निःशुल्क विधिक साक्षरता एवं ‘स्कूल चलें हम’ जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन पैरालीगल वॉलंटियर्स द्वारा किया गया।
शिविर के दौरान ग्रामीणों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं, निःशुल्क विधिक सहायता तथा विभिन्न कानूनी सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। पैरालीगल वॉलंटियर्स ने सरल भाषा में लोगों को उनके अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं से अवगत कराया।
इस अवसर पर पैरालीगल वॉलंटियर्स आर्यन सोनी एवं आराध्या सोलंकी द्वारा बैगा जनजाति के बच्चों को स्कूल बैग, बिस्किट एवं केक वितरित किए गए, जिससे बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया। साथ ही अभिभावकों और बच्चों को यह संकल्प दिलाया गया कि ग्राम का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा और सभी नियमित रूप से विद्यालय जाएंगे।
कार्यक्रम में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर, रावेंद्र कुमार सोनी ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए सभी बच्चों के विद्यालय में प्रवेश और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने आदिवासी एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा के अधिकार, वन अधिकार अधिनियम तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी भी विस्तार से दी।
इसी क्रम में लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अधिवक्ता आयुष सोनी ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र व्यक्तियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इच्छुक व्यक्ति संबंधित तहसील विधिक सेवा समिति या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन कर सकते हैं। साथ ही टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के माध्यम से घर बैठे विधिक सलाह प्राप्त करने की सुविधा की जानकारी भी दी गई।
शिविर के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं को भी सुना गया और उन्हें समाधान हेतु उचित मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बैगा जनजाति समुदाय में शिक्षा और विधिक जागरूकता को बढ़ावा देना तथा यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भाग लेकर शिक्षा एवं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया।




