दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग में स्वाति गुप्ता को नियुक्त किया सदस्य

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार श्रीमती स्वाति गुप्ता को दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) का सदस्य नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 तथा दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग नियम, 2008 के अंतर्गत की गई है।
श्रीमती गुप्ता का सार्वजनिक जीवन, प्रशासनिक अनुभव, कानूनी ज्ञान एवं सामाजिक सेवा का लंबा और समृद्ध अनुभव रहा है। वे भारतीय स्टेट बैंक में केंद्र सरकार द्वारा नामित निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। बैंकिंग और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता उन्हें एक सक्षम प्रशासक के रूप में स्थापित करती है।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर तथा एलएलबी की डिग्री प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त उन्होंने आईआईएम इंदौर से एडवांस मैनेजमेंट प्रोग्राम, हार्वर्ड बिजनेस पब्लिशिंग का डायरेक्टर्स डेवलपमेंट प्रोग्राम, सीएएफआरएएल का केवाईसी एवं एएमएल कार्यक्रम, आईडीआरबीटी का साइबर सुरक्षा कार्यक्रम तथा आईआईएम अहमदाबाद का वूमेन इंडिपेंडेंट डायरेक्टर लीडरशिप प्रोग्राम सहित कई प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं।
राजनीतिक एवं जनसेवा के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे वर्ष 2012 से 2017 तक दिलशाद गार्डन वार्ड-241 से पार्षद रहीं। इसके बाद 2017 से 2022 तक नगर निगम की शिक्षा समिति की नामित सदस्य के रूप में कार्य किया। उन्होंने उत्तर शाहदरा वार्ड समिति की अध्यक्ष, विधि एवं सामान्य प्रयोजन समिति की अध्यक्ष, नियुक्ति समिति की उपाध्यक्ष सहित विभिन्न समितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। वर्ष 2010 से वे श्री शीशपाल पार्वती देवी चैरिटेबल ट्रस्ट की ट्रस्टी के रूप में महिला सशक्तिकरण, बाल कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं और कानूनी जागरूकता से जुड़े कार्यों का संचालन कर रही हैं। वे ट्रांस यमुना सोशल वेलफेयर एसोसिएशन से भी जुड़ी रही हैं तथा पूर्वी दिल्ली में अनेक जनकल्याणकारी गतिविधियों में भागीदारी निभाती रही हैं। इसके अलावा वे रॉयल सैफायर प्री-स्कूल के संचालन से भी संबद्ध रही हैं।
श्रीमती स्वाति गुप्ता की यह नियुक्ति बाल अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उनके प्रशासनिक अनुभव, कानूनी समझ और सामाजिक प्रतिबद्धता के चलते आयोग को नई दिशा और सशक्त नेतृत्व मिलने की उम्मीद है। उनके मार्गदर्शन में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आयोग और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा।




