दिल्ली में धूमधाम से मनाया गया ‘कमिश्नरेट दिवस’, पुलिस को संवेदनशील और जन-केंद्रित बनने पर जोर

एलजी ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नरेट दिवस पर पुलिस को पेशेवर, संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनने पर जोर दिया। उन्होंने पुलिस की दृश्यता बढ़ाने, मानवीय दृष्टिकोण अपनाने, तकनीक का उपयोग करने और जन-केंद्रित सेवा देने की बात कही।

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली स्टेट हेड

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने बुधवार को किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड में पूरे उत्साह और भव्यता के साथ ‘कमिश्नरेट दिवस’ मनाया। इस अवसर पर उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए पुलिस व्यवस्था को अधिक पेशेवर, संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने पर बल दिया।
उपराज्यपाल ने पुलिसकर्मियों के लिए चार प्रमुख बिंदुओं पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस की **दृश्यता** बढ़नी चाहिए, जिससे सड़कों, बाजारों और गलियों में अधिक संख्या में पुलिसकर्मी गश्त करते नजर आएं और अपराधों में स्वतः कमी आए। इसके साथ ही मानवीयता पर जोर देते हुए उन्होंने पुलिस को जनता के प्रति संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने तकनीक आधारित पुलिसिंग को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीकों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि वे अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। वहीं जन-केंद्रित दृष्टिकोण को पुलिस व्यवस्था का मूल आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि हर सेवा और कार्रवाई के केंद्र में आम नागरिक होना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि दिल्ली में एक जुलाई 1978 को दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई थी, जिसके अनुसार पुलिस का पर्यवेक्षण और संचालन उपराज्यपाल के अधीन होता है। वर्ष 2022 में दिल्ली पुलिस की प्लेटिनम जुबली (75वीं वर्षगांठ) के अवसर पर ‘कमिश्नरेट दिवस परेड’ की शुरुआत की गई थी, जिसके बाद से हर वर्ष एक जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है।
उपराज्यपाल ने ‘ऑपरेशन विश्वास’ के तहत बड़ी संख्या में मोबाइल फोन की रिकवरी की सराहना करते हुए कहा कि नागरिकों की खोई संपत्ति वापस दिलाकर पुलिस जनता का विश्वास मजबूत कर रही है। ट्रैफिक प्रबंधन पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गलत दिशा में वाहन चलाना, ट्रिपल राइडिंग और बिना हेलमेट वाहन चलाने जैसी उल्लंघनों को रोकने के लिए जनसहभागिता और व्यवहार में बदलाव अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने युवा पुलिस अधिकारियों को जनता के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने और भरोसा कायम करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही पुलिसकर्मियों को समय पर पदोन्नति और पारदर्शी ट्रांसफर नीति लागू करने का आश्वासन भी दिया। उपराज्यपाल ने शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों की सहायता के लिए सीएसआर फंड के उपयोग सहित नई पहल शुरू करने की बात कही। पुलिसिंग में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए उन्होंने दिल्ली पुलिस की महिला पाइप एवं ब्रास बैंड की विशेष प्रशंसा की।

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